नई दिल्ली। HIV के इलाज और फंक्शनल क्योर की दिशा में सफलता मिली है। नये अध्ययन में पाया गया कि दवा फिंगोलिमोड एचआईवी वायरस को शरीर में पनपने से रोकने में प्रभावी है। यह दवा मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी से जुड़ी दुर्लभ बीमारी के इलाज में इस्तेमाल होती है। शोधकर्ताओं ने मल्टीपल स्केलेरोसिस से पीडि़त मरीज का अध्ययन किया।
वह कई वर्षों से फिंगोलिमोड ले रहा था। इस दौरान उसे एचआईवी संक्रमण हुआ। सामान्य मरीजों की तुलना में उसके शरीर में वायरस का स्तर काफी कम था। तीन साल तक एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) लेने के बाद उसमें एचआईवी का सक्रिय भंडार लगभग खत्म हो गया।
बार्सिलोना के आईडीआईबीएपीएस और हॉस्पिटल क्लीनिक डी बार्सिलोना के वैज्ञानिकों ने मिलकर ये अध्ययन किया है। इलाज शुरू होने के एक साल बाद मरीज में वायरस का रिजर्वायर भी 28 गुना कम मिला। तीन साल बाद उसके शरीर में कोई भी सक्रिय एचआईवी वायरस नहीं मिला।
एचआईवी का वायरस इलाज के बाद भी शरीर की कुछ कोशिकाओं में छिपा रहता है। इस अध्ययन में फिंगोलिमोड लेने वाले मरीज की कोशिकाओं से वायरस खत्म हो गया। साथ ही उसको दोबारा सक्रिय करना भी संभव नहीं हो पाया।










