सागर (मप्र)। सिविल अस्पताल में डॉक्टर की दवा से मासूम की आंखें खराब होने का मामला सामने आया है। बंडा सिविल अस्पताल में इलाज के बाद डेढ़ साल के मासूम की आंखों की रोशनी चली गई। बच्चे के पिता ने इलाज में गंभीर लापरवाही का आरोप लगातया है। दावा किया है कि चिकित्सक ने आंखों में डालने वाली दवा की जगह नाक की दवा डाल दी। इससे बच्चे की हालत लगातार बिगड़ती गई। अंततः उसकी दृष्टि चली गई। पुलिस से कर निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की गई है।
ये है मामला
ग्राम भूसा कमलपुर निवासी इन्द्राज अपने एक वर्ष सात माह के बेटे को बंडा सिविल अस्पताल लाया था। बच्चे को सर्दी और आंखों में लालिमा की शिकायत थी। जांच के बाद चिकित्सक ने आई ड्रॉप, पैरासिटामोल सिरप, इंजेक्शन सहित अन्य दवाएं दीं। आरोप है कि इसी दौरान आंखों में गलत दवा डाल दी गई। इसके बाद बच्चे की स्थिति तेजी से बिगड़ने लगी।
बच्चे की हालत गंभीर होने पर उसे जिला अस्पताल सागर रेफर किया गया। वहां से भोपाल स्थित एम्स भेजा गया। चिकित्सकों ने बताया कि बच्चे की आंखों की रोशनी पूरी तरह समाप्त हो चुकी है। पीड़ित पिता ने बंडा थाने में आवेदन देकर संबंधित चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
अस्पताल प्रबंधन ने दी सफाई
बंडा के सीबीएमओ डॉ. योगेन्द्र खटीक ने कहा कि बच्चे को कॉर्नियल अल्सरेशन और आंखों में गंभीर संक्रमण था। इसी कारण उसे सुपर स्पेशलिस्ट उपचार के लिए जिला अस्पताल सागर रेफर किया था। फिलहाल मामले की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।










