लखनऊ (उप्र)। KGMU यूरोलॉजी विभाग में करोड़ों के दवा घोटाले में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच समिति ने आरोपी संविदा कर्मचारी की बंद अलमारी खुलवाई। उसमें लाखों रुपये कीमत की महंगी दवाएं बरामद हुईं। जांच में सामने आया कि ये दवाएं असाध्य रोग योजना के तहत मंगाई गई थीं। जांच समिति की मौजूदगी में सभी दवाओं का रिकॉर्ड तैयार किया गया।

बरामद दवाओं का स्टॉक रजिस्टर और मरीजों के रिकॉर्ड से मिलान शुरू कर दिया है। जांच की जा रही है कि इन दवाओं को अवैध रूप से बेचने की तैयारी तो नहीं थी। दवाओं की कुल कीमत का आंकलन अभी नहीं किया जा सका है। फिलहाल जांच कमेटी दवाओं की लिस्ट समेत दूसरी जानकारी जुटा रही है। उसका मिलान किया जा रहा है। सोमवार तक बरामद दवाओं की रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को सौंपी जाएगी।

प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने बताया कि जांच केवल एक अलमारी तक सीमित नहीं है। यूरोलॉजी विभाग की सभी अलमारियों और स्टोर की तलाशी ली जा रही है। एक अन्य अलमारी से लाखों रुपये की दवाएं भी मिली हैं। इन दवाओं को वहां रखे जाने के कारणों की भी जांच की जा रही है। मरीजों के इंडेंट के अनुसार दवाएं मंगाई गई हैं। मरीज के हिसाब से दवाओं की सूची तैयार कराई जा रही है। इन्हें जांच के बाद मरीजों में बांटा भी जा सकता है। हालांकि इस पर अभी कमेटी ने कोई फैसला नहीं लिया है।

अभी तक 3 बर्खास्त

यूरोलॉजी विभाग में दवाओं के घपले में तीन संविदा कर्मचारी बर्खास्त किए जा चुके हैं। एक नियमित फार्मासिस्ट को निलंबित किया जा चुका है। वहीं, विभागाध्यक्ष को पद से हटा दिया है। संविदा कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कराया गया है।