नई दिल्ली। हाई कोर्ट ने 38 सरकारी अस्पतालों के ऑडिट का आदेश दिया है। एक 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला को बेड नहीं मिलने की घटना प्रकाश में आई। इसने राजधानी के सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार को कड़ी फटकार लगाई।
वहीं, राजधानी के सभी 38 सरकारी अस्पतालों का ऑडिट कराने का आदेश भी दिया है। कोर्ट ने कहा कि अस्पतालों में खामियां और महंगे चिकित्सा उपकरणों का इस्तेमाल न होना जनता के पैसे की भारी बर्बादी है। मामला कमर जहां नाम की 70 वर्षीय महिला से जुड़ा है।
उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया जाना था, लेकिन बेड नहीं मिला। हैरानी की बात यह रही कि अस्पताल की वेबसाइट पर उसी समय बेड उपलब्ध दिख रहे थे। सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि कई इमरजेंसी हेल्पलाइन या तो बंद थीं या उन पर फोन उठा रहे थे। जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की बेंच ने आदेश में कहा कि अस्पतालों में नियमों को सही तरीके से लागू नहीं किया गया है। इसका असर सीधे मरीजों की जान पर पड़ रहा है।
सरकारी अस्पतालों का होगा ऑडिट
सुनवाई के दौरान दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट का मामला भी सामने आया। कोर्ट को बताया गया कि साल 2017 में करीब 15.42 करोड़ रुपये की लागत से खरीदी गई साइक्लोट्रॉन मशीन बंद पड़ी है। इस पर कोर्ट ने कहा कि यह जनता के संसाधनों की भारी बर्बादी का उदाहरण है। हाई कोर्ट ने नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर को 31 जुलाई तक सभी सरकारी अस्पतालों का औचक ऑडिट करने को कहा है।










