जयपुर (राजस्थान)। गैर-मान्यता प्राप्त अस्पताल में इलाज का खर्च नहीं रोक सकते। यह निर्देश राजस्थान हाईकोर्ट ने दिए हैं। कोर्ट ने दिल्ली के अस्पतालों में इलाज कराने वाले परिवार को मेडिकल खर्च की प्रतिपूर्ति करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि कोविड-19 जैसे समय में मरीज के लिए तत्काल इलाज उपलब्ध होना सबसे महत्वपूर्ण था। मरीजों को परिस्थितियों के कारण नजदीकी उपलब्ध अस्पताल में इलाज कराने के लिए मजबूर होना पड़ा। ऐसे में केवल अस्पताल के गैर-मान्यता प्राप्त होने से मेडिकल रिइम्बर्समेंट से इनकार नहीं किया जा सकता।
याचिकाकर्ता मृतक पूर्व एसोसिएट प्रोफेसर की बेटी थीं। उनके पिता वर्ष 2000 में राजस्थान विश्वविद्यालय से सेवानिवृत्त हुए थे। कोविड-19 के दौरान दिल्ली के कई अस्पतालों में उनका इलाज चला। 2021 में उनकी मृत्यु हो गई। परिवार ने करीब 9 लाख के मेडिकल खर्च की प्रतिपूर्ति का दावा किया था। इसे इस आधार पर खारिज कर दिया कि इलाज राजस्थान के बाहर गैर-मान्यता प्राप्त अस्पतालों में कराया गया। यह साबित नहीं किया गया कि राजस्थान में जरूरी इलाज उपलब्ध नहीं था।
कहा कि गैर-मान्यता प्राप्त अस्पताल या राज्य से बाहर इलाज कराने की स्थिति में भी उचित मेडिकल रिइम्बर्समेंट दिया जा सकता है। कोविड महामारी के दौरान तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होना सर्वोच्च प्राथमिकता थी। इसलिए ऐसे असाधारण हालात में रिइम्बर्समेंट से इनकार करना कानूनी रूप से उचित नहीं है। हाईकोर्ट ने संबंधित नियमों के तहत मेडिकल क्लेम की अनुमन्य राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया। साथ ही इस राशि पर 6 फीसदी सालाना ब्याज देने को भी कहा।










