नई दिल्ली। नया एंटीवेनम सांप के मौजूदा जहर पर 10 गुना ज्यादा असरदार पाया गया है। सांप के काटने से हर साल दुनिया भर में हजारों लोगों की मौत होती है। सर्पदंश के इलाज में अभी एंटीवेनम दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है। इन दवाओं की अपनी सीमाएं हैं। अब वैज्ञानिकों ने सांपों के शरीर में मौजूद प्राकृतिक सुरक्षा प्रणाली से एक नया रास्ता खोजा है। यह खोज भविष्य में ज्यादा सुरक्षित और प्रभावी एंटीवेनम बनाने में मदद कर सकती है।
अमेरिका के शोधकर्ताओं ने पाया कि जहरीले सांपों के खून में कुछ प्रोटीन मौजूद होते हैं। ये उनके अपने जहर के असर को रोक सकते हैं। इन्हीं प्राकृतिक सुरक्षा देने वाले प्रोटीनों से नई एंटीवेनम तकनीक विकसित करने की दिशा में काम शुरू किया है। अभी जो एंटीवेनम दवाएं इस्तेमाल की जाती हैं। उन्हें बनाने के लिए बड़े जानवरों को सांप के जहर की थोड़ी मात्रा दी जाती है।
इसके बाद उनके शरीर में बनने वाली एंटीबॉडी को दवा तैयार की जाती है। यह प्रक्रिया महंगी और जटिल होती है। अलग-अलग सांपों के जहर में अलग-अलग प्रकार के विषैले तत्व होते हैं। इसलिए एक एंटीवेनम हर तरह के जहर पर समान रूप से प्रभावी नहीं होता। कई बार इन दवाओं से मरीजों में गंभीर एलर्जी जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। नए अध्ययन में वैज्ञानिकों ने कई प्राकृतिक प्रोटीनों को मिलाकर परीक्षण किया। अकेले इस्तेमाल किए जाने पर इन प्रोटीनों का असर सीमित था। जब इन्हें एक साथ मिलाया गया तो इनकी जहर रोकने की क्षमता काफी बढ़ गई।










