जींद (अस्पताल)। निजी अस्पताल के 2 डॉक्टरों और संचालक पर एफआईआर दर्ज हुई है। कोर्ट के कड़े रुख के बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। चौधरी कुलदीप सिंह मेमोरियल अस्पताल के दो डॉक्टरों और संचालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। यह कार्रवाई एडवोकेट पुष्पेंद्र की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत मामले में की गई है। कोर्ट ने पुलिस को प्राथमिकी दर्ज कर विस्तृत जांच के निर्देश दिए थे।

बिना अनुमति के सर्जरी करने का आरोप

अधिवक्ता पुष्पेंद्र को ब्लड प्रेशर बढऩे और पैरालिटिक अटैक के कारण सिविल अस्पताल ले जाया गया था। वहां से उन्हें पीजीआई रोहतक रेफर कर दिया गया। आरोप है कि एंबुलेंस चालक के बहकावे में आकर परिजन उन्हें निजी चौधरी कुलदीप सिंह मेमोरियल अस्पताल ले गए। वहां डॉक्टरों ने 2.10 लाख रुपये का खर्च बताया। परिजनों की बिना लिखित अनुमति के ही मरीज की न्यूरोसर्जरी कर दी। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में गंभीर लापरवाही बरतने के आरोप लगाए हैं। सर्जरी के समय कार्डियोलॉजिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट और प्रशिक्षित एनेस्थिसियोलॉजिस्ट मौजूद नहीं थे।

अस्पताल में सीटी स्कैन और एमआरआई जैसी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं। ऑपरेशन के बाद मरीज को आवश्यक पोस्ट-ऑपरेटिव केयर नहीं दी गई। इससे उनकी मौत हो गई।

परिजनों ने एसपी कार्यालय में शिकायत दी थी। इस बारे में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। पुलिस के अनुरोध परचार डॉक्टरों का मेडिकल बोर्ड गठित हुआ। लेकिन उसकी रिपोर्ट समय पर जमा नहीं की गई। इस पर अदालत ने पुलिस को तुरंत केस दर्ज करने का कड़ा आदेश दिया। पुलिस ने डॉ. नमन तनेजा, डॉ. कनिका और अस्पताल के डायरेक्टर दीपांकर देसवाल के खिलाफ केस दर्ज किया है।