सीकर (कैलाश शर्मा) राजस्थान सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम’ (RGHS) में फर्जीवाड़ा करने वाले अस्पतालों के खिलाफ राज्य सरकार ने सख्त रुख अपना लिया है।

ताजा मामले में सीकर शहर के एस.बी. मित्तल मेमोरियल हार्ट एंड क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल पर बड़ी गाज गिरी है।
आरजीएचएस विभाग ने वित्तीय अनियमितताओं और धोखाधड़ी के आरोप में अस्पताल को तुरंत प्रभाव से योजना से निलंबित (सस्पेंड) कर दिया है।

इस्तीफा दे चुकी डॉक्टर के नाम पर बने बिलजांच में सामने आया है कि अस्पताल में कार्यरत डॉ. अलका आर्य ने 20 अप्रैल 2026 को ही अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।
इसके बावजूद, अस्पताल प्रबंधन ने जून महीने में डॉ. आर्य की आईडी और नाम का दुरुपयोग किया। उन्होंने डॉक्टर की अनुपस्थिति में मरीजों का इलाज दिखाया और आरजीएचएस पोर्टल पर फर्जी क्लेम अपलोड कर दिए।

AI ट्रैकिंग से पकड़ा गया
घोटालाआरजीएचएस विभाग के डिजिटल ट्रैकिंग और एंटी-फ्रॉड सिस्टम ने इस संदिग्ध ट्रांजेक्शन को पकड़ा। गहन जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि नौकरी छोड़ चुकी डॉक्टर के नाम पर अस्पताल ने 315 फर्जी क्लेम पेश कर दिए थे।

1.इन फर्जी दावों का पूरा गणित इस प्रकार है:
कुल फर्जी क्लेम: 315 [2]ओपीडी (OPD) मामले: 227 [2]आईपीडी (IPD) यानी भर्ती मरीज: 88 [2]
कुल घोटाला राशि: ₹1,42,489

[2]नोटिस का जवाब नहीं दे पाया अस्पताल, हुआ सस्पेंशनगड़बड़ी पकड़े जाने पर विभाग ने अस्पताल प्रबंधन को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी कर स्पष्टीकरण मांगा था। तय समय सीमा के भीतर अस्पताल प्रशासन कोई भी संतोषजनक जवाब या सबूत पेश नहीं कर सका।इसके बाद, आरजीएचएस की परियोजना निदेशक डॉ. निधि पटेल के आदेश पर अस्पताल को योजना से बाहर (ब्लैकलिस्ट/सस्पेंड) कर दिया गया।
विभाग ने फिलहाल ₹43,007 के क्लेम को पूरी तरह रिजेक्ट कर दिया है और बाकी राशि की वसूली तथा कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

सरकार की कड़ी चेतावनीसीकर में आरजीएचएस को लेकर यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी फर्जी जांच और एमआरआई क्लेम के मामले में गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। चिकित्सा विभाग ने साफ कर दिया है कि सरकारी पैसे का दुरुपयोग करने वाले किसी भी अस्पताल या मेडिकल स्टोर को बख्शा नहीं जाएगा।