जयपुर / उदयपुर (कैलाश शर्मा): राजस्थान सरकार के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सेवाएं निदेशालय ने लिंग चयन (Sex Selection) को बढ़ावा देने के आरोप में एक बड़ी कार्रवाई की है।
चिकित्सा विभाग ने नीलकंठ फर्टिलिटी एंड वूमेन केयर हॉस्पिटल प्राइवेट लिमिटेड के अधीन संचालित राज्यभर के कुल 9 एआरटी और सरोगेसी केंद्रों के पंजीकरण को तत्काल प्रभाव से आगामी आदेशों तक निलंबित (Suspend) कर दिया है।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरी कार्रवाई 23 अगस्त 2026 को प्रकाशित एक विज्ञापन के बाद अमल में लाई गई है।
इस विज्ञापन में नीलकंठ आईवीएफ सेंटर द्वारा ‘From Science to Cradle’ टैगलाइन के साथ नीले रंग के मोजे पहने हुए एक नवजात शिशु और बैकग्राउंड में नीले रंग का भ्रूण (Embryo) दिखाया गया था।
चिकित्सा विभाग के नोटिस के अनुसार, चूंकि नीला रंग ‘Male Child’ (लड़का) का प्रतीक माना जाता है, इसलिए पहली नज़र में यह प्रतीत होता है कि चिकित्सा केंद्र द्वारा निसंतान दंपत्तियों को आईवीएफ तकनीक के माध्यम से लड़का होने की गारंटी या इशारा दिया जा रहा है।
कानूनों का स्पष्ट उल्लंघन:
राजस्थान सरकार की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि यह कृत्य इन कानूनों का सीधा उल्लंघन है:।
1 .एआरटी अधिनियम, 2021 की धारा 26 (2) और (3): जो लिंग भेद और लिंग चयन से जुड़े विज्ञापनों को पूरी तरह प्रतिबंधित करती है।
2. एआरटी अधिनियम, 2021 का अध्याय V (बिंदु संख्या 32): इसके तहत किसी भी एआरटी क्लिनिक के लिए लिंग जांच से संबंधित कार्य करना या किसी भी माध्यम से इसका प्रचार करना पूरी तरह गैर-कानूनी है।
इन 9 केंद्रों पर गिरी गाज:
राज्य नोडल अधिकारी (एआरटी एवं सरोगेसी) के आदेश के तहत नीलकंठ ग्रुप के इन सेंटर्स पर कार्रवाई की गई है:•
जयपुर: दो एआरटी क्लिनिक (लेवल-2), एक सरोगेसी क्लिनिक और एक एआरटी बैंक।• *
उदयपुर: भुवनेश्वर (भुवाना) स्थित सेंटर।•
जोधपुर, कोटा, अजमेर और भीलवाड़ा: स्थित एआरटी क्लिनिक्स।
विभाग ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि नियमों की अवहेलना करने वाले संस्थानों के खिलाफ नियमों के अंतर्गत सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।










