देहरादून: उत्तराखंड के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप कर रहे एमबीबीएस छात्रों को राज्य सरकार ने बड़ी राहत दी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में मेडिकल इंटर्न का मासिक स्टाइपेंड 17,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये करने का फैसला लिया गया है। इससे इंटर्न को हर महीने 8,000 रुपये ज्यादा मिलेंगे।

पांच सरकारी मेडिकल कॉलेजों के इंटर्न को फायदा

यह फैसला प्रदेश के पांच सरकारी मेडिकल कॉलेजों में काम कर रहे इंटर्न पर लागू होगा। फैसले से पहले करीब 600 इंटर्न पिछले पांच दिनों से स्टाइपेंड बढ़ाकर 30,000 रुपये करने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। सरकार ने उनकी मांग को आंशिक रूप से मानते हुए स्टाइपेंड में करीब 47 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है।

इंटर्नशिप क्यों है अहम

एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद एक साल की अनिवार्य रोटेटरी इंटर्नशिप करनी होती है। इस दौरान इंटर्न अस्पताल के विभिन्न विभागों में डॉक्टरों की निगरानी में मरीजों की देखभाल करते हैं। सरकारी अस्पतालों में इंटर्न ओपीडी, वार्ड और इमरजेंसी में अहम भूमिका निभाते हैं और कई बार लंबी शिफ्टों में काम करते हैं। इंटर्नशिप पूरी होने के बाद ही उन्हें डॉक्टर के रूप में स्थायी पंजीकरण मिलता है।

स्टाइपेंड को लेकर देशभर में उठती रही है मांग

देश के कई राज्यों में मेडिकल इंटर्न और रेजिडेंट डॉक्टर कम स्टाइपेंड को लेकर समय-समय पर आंदोलन करते रहे हैं। अलग-अलग राज्यों में इंटर्न को मिलने वाले स्टाइपेंड में काफी अंतर है। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) भी कॉलेजों को इंटर्न को उचित स्टाइपेंड देने के निर्देश दे चुका है। विशेषज्ञ मानते हैं कि पर्याप्त स्टाइपेंड से युवा डॉक्टरों का मनोबल बढ़ता है और वे बेहतर तरीके से काम कर पाते हैं।

कैबिनेट के अन्य अहम फैसले

इसी बैठक में स्वास्थ्य से जुड़ा एक और अहम फैसला लिया गया। हरिद्वार के सलेमपुर में कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआई) अस्पताल के निर्माण के लिए 15 एकड़ जमीन देने की मंजूरी दी गई। इससे हरिद्वार के औद्योगिक क्षेत्र में काम करने वाले हजारों बीमित कर्मचारियों और उनके परिवारों को इलाज की बेहतर सुविधा मिल सकेगी।

इसके अलावा कैबिनेट ने खेल नीति के तहत पदक विजेता खिलाड़ियों के लिए सरकारी पदों पर नियुक्ति समेत कई अन्य प्रस्तावों को भी मंजूरी दी।

इंटर्न ने जताई मिली-जुली प्रतिक्रिया

स्टाइपेंड बढ़ने से इंटर्न को राहत मिली है, हालांकि उनकी मूल मांग 30,000 रुपये की थी। माना जा रहा है कि इस फैसले के बाद राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में स्वास्थ्य सेवाएं सामान्य रूप से चलती रहेंगी।

स्रोत: द इंडिया डेली, आकाश ज्ञान वाटिका (सितंबर 2026)