नबरंगपुर (ओडिशा)। नवजात का शव घर लाने के लिए सरकारी वाहन नहीं मिल पाया। ऐसे में परिजनों को राशन कार्ड गिरवी रखना पड़ा। तब जाकर उन्हें निजी एंबुलेंस किराये पर मिली। इसके लिए उन्हें 5,000 रुपये देने पड़े।
यह है मामला
एक परिवार को अपने नवजात बेटे का शव घर लाने के लिए सरकारी वाहन नहीं मिला। उन्हें कथित तौर पर अपना राशन कार्ड गिरवी रखना पड़ा। उन्हें 5,000 रुपये में निजी एंबुलेंस किराये पर लेनी पड़ी। सरकारी अस्पतालों में मरीजों के लिए कई सुविधाएं उपलब्ध हैं। लेकिन नबरंगपुर जिले के एक गरीब परिवार को कठिनाई उठानी पड़ी है। उन्होंने आरोप लगाया है कि जरूरत के समय सरकारी सेवा का लाभ नहीं मिलाा। बच्चे की मौत के बाद उन्होंने अस्पताल से शव को घर ले जाने के लिए वाहन मांगा। काफी इंतजार पर भी उन्हें वाहन नहीं मिला। आखिरकार परिवार को राशन कार्ड गिरवी रखकर पैसे जुटाने पड़े। इसके बाद 5,000 रुपये खर्च कर निजी एंबुलेंस की व्यवस्था की गई।
डालेगुड़ा गांव की अंबिका ने एक बेटे को जन्म दिया था। बच्चा कम वजन का था। उसे बेहतर इलाज के लिए अस्पताल रेफर कर दिया गया। अस्पताल में इलाज के दौरान बच्चे की मौत हो गई। शव को ले जाने के लिए वाहन की व्यवस्था करना परेशानी बन गया। सरकारी वाहन उपलब्ध नहीं हो सका। पैसे जुटाने के लिए राशन कार्ड गिरवी रखना पड़ा। तब जाकर उन्हें निजी एंबुलेंस किराये पर मिली। 5,000 रुपये में निजी एंबुलेंस किराये पर मिल पाई।










