नयी दिल्ली। दवा उद्योग का महंगी दवाओं के उत्पादन पर जोर है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का दवा उद्योग कम लागत वाली दवाओं पर कम ध्यान दे रहा है। इससे आगे बढक़र उच्च मूल्य वाली दवाओं और उन्नत उपचारों की ओर बढ़ रहा है। दवा कंपनियां एपीआई के विनिर्माण में निवेश कर रही हैं।
इसके पीदे आयात पर निर्भरता घटाने और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अपनी स्थिति मजबूत करने का मकसद है। इस बदलाव के पीछे पुरानी बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की बढ़ती मांग है। वहीं निर्यात के नए अवसर और विनिर्माण क्षमता बढ़ाने के लिए सरकार की प्रोत्साहन योजनाएं भी प्रमुख हैं।
जुबिलेंट इंग्रेविया के सीईओ एवं प्रबंध निदेशक दीपक जैन ने कहा कि भारत का दवा उद्योग उच्च मूल्य वाले, नवाचार आधारित दीर्घकालिक संरचनात्मक बदलाव के दौर से गुजर रहा है। वैश्विक दवा कंपनियां आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती को प्राथमिकता दे रही हैं। ऐसे में एपीआई, उन्नत मध्यवर्ती रसायनों और अनुबंध पर सीडीएमओ के क्षेत्र में घरेलू क्षमता आयात पर निर्भरता घटाने के लिए महत्वपूर्ण होगी।
आईक्यूवीआईए के मुताबिक, भारत का घरेलू दवा बाजार सितंबर 2026 में सालाना आधार पर 17.1 प्रतिशत बढ़ा। यह तीन साल में किसी एक महीने की सबसे अधिक वृद्धि है। हमदर्द लेबोरेटरीज इंडिया के वैश्विक निर्यात कारोबार प्रमुख एवं वरिष्ठ महाप्रबंधक पंकज बनर्जी ने कहा कि भारत के दवा और आयुष क्षेत्र में 2030 तक निरंतर विस्तार की संभावना है। रोगों की रोकथाम, जीवनशैली से जुड़ी सेहत, वैज्ञानिक प्रमाणों और हर्बल दवाओं की अंतरराष्ट्रीय मांग से इस वृद्धि को गति मिलेगी।
इंफॉर्मा मार्केट्स इंडिया के एमडी योगेश मुद्रास ने कहा कि देश का दवा उद्योग वैश्विक प्रतिस्पर्धा और प्रौद्योगिकी के स्तर पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। सीपीएचआई इंडिया का आयोजन 23 से 25 नवंबर तक दिल्ली के द्वारका स्थित यशोभूमि के आईआईसीसी में होगा। वहीं, पीएमईसी इंडिया 24 से 26 नवंबर तक ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपोजिशन मार्ट में किया जाएगा।





