पुणे (महाराष्ट्र)। आयुर्वेदिक दवा कंपनी पर छापेमारी का मामला प्रकाश में आया है। औषधि प्रशासन ने यह कार्रवाई जेजुरी स्थित इंड्यूकेयर फार्मा प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ की है। विभाग ने कंपनी का आयुर्वेदिक दवा निर्माण लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द कर दिया है। जांच में कंपनी द्वारा गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस और कई नियमों का गंभीर उल्लंघन सामने आया।
छह आयुर्वेदिक दवाएं मानकों पर फेल
जांच में कंपनी की छह प्रमुख आयुर्वेदिक दवाएं गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरीं। इन्हें नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी घोषित किया गया। जांच रिपोर्ट में कई दवाओं में गंभीर खामियां सामने आईं। जांच के दौरान हिंग्वाष्टक चूर्ण और त्रिफला चूर्ण में कीड़ और अन्य बाहरी अशुद्ध पदार्थ पाए गए। यह स्थिति दवाओं के निर्माण और भंडारण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। सिंहनाद गुग्गुल और पुनर्नवादी मंडूर में फंगस की वृद्धि मिली। गोलियों पर काले धब्बे पाए गए। वहीं कांचनार गुग्गुल और त्रिफला गुग्गुल में निर्धारित सीमा से अधिक बैक्टीरिया, यीस्ट और मोल्ड मिले। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी दवाएं मरीजों के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकती हैं।
फैक्ट्री में साफ-सफाई का अभाव
उत्पादन इकाई में कई बुनियादी कमियां भी मिलीं। फैक्ट्री में साफ-सफाई की कमी थी। टूटी हुई छलनियां इस्तेमाल की जा रही थीं। फर्श और फिल्टर गंदे पाए गए। तापमान और नमी नियंत्रित करने वाले जरूरी उपकरण भी मौजूद नहीं थे। कंपनी के पास कच्चे माल की जांच से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध नहीं थे। मशीनों की सफाई और पैकेजिंग सामग्री के रखरखाव का रिकॉर्ड भी अधूरा मिला। इससे निर्माण प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठे।
कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर भी दिया गया। इसके बावजूद कंपनी जांच में मिली कमियों पर कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सकी। इसके बाद लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द करने का फैसला लिया गया।










