नई दिल्ली। अस्पताल में बच्चों की खरीद-फरोख्त के रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है। नवजात को खरीदने-बेचने की िशकायत िमली थी। स्पेशल स्टाफ की टीम ने बेगमपुर के हीरा मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल में छापा मारा।
डॉ. विवेकी और साएबा गिरोह के मास्टरमाइंड
सूचना थी कि एक महिला अलग-अलग बच्चों के साथ देखी जाती है। निगरानी के बाद महिला की पहचान की गई। तस्करी का शक होने पर एक नकली ग्राहक महिला के पास भेजा। पहले उसने मना किया, फिर तैयार हो गई। 20 हजार रुपये टोकन मनी दिए। नकली ग्राहक को बच्चा सौंपा गया। इशारा मिलते ही महिला ज्योति उर्फ कमलेश को दबोच लिया। उसी दिन ज्योति की साथी शालू और ललित को दबोचा गया। तीनों महज 4-5 दिन का नवजात लेकर आए थे। तीनों से पूछताछ के बाद पुलिस ने अस्पताल में रेड की। मौके से डॉ. विवेकी और फिर बाकी आरोपियों को पकड़ा।
बचाए गए पांच बच्चों में चार आदिवासी समुदाय से संबंधित हैं। एक बच्चा दिल्ली का है। इनमें एक चार माह का नवजात पानीपत (हरियाणा) का है। 27 दिन के एक मेल और फिमेल नवजात ग्वालियर के हैं। एक अन्य नवजात पानीपत, पांचवां नवजात दिल्ली का है। बरामद पांचों बच्चों को शेल्टर होम में भेज दिया है। उनके परिजनों का पता लगाया जा रहा है।
पता चला है कि है कि लोगों को लालच देकर 10-15 हजार में बच्चा खरीदते हैं। उनको बेगमपुर स्थित हीरा मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल लाया जाता था। अस्पताल में रखकर उसके खरीदार की तलाश की जाती थी। लड़की को 4 लाख और लड़के को 5 से 10 लाख में बेच दिया जाता था।










