नई दिल्ली। गंजापन के इलाज की कारगर दवा मिलने का दावा किया है। गंजापन या सिर से बालों का झडऩा आज आम समस्या है। जवान लडक़ों के सिर से बाल गायब हो रहे हैं। गंजेपन की समस्या से मुक्ति दिलाने के लिए वैज्ञानिक रात दिन दिन लगे हुए हैं। वे इसकी दवा बनाने के बहुत करीब आ गए हैं। इस बीच वैज्ञानिकों ने इसका तात्कालिक समाधान निकाला है। दरअसल, चेहरे पर कील-मुंहासे की एक दवा वैज्ञानिकों ने बनाई थी। इसे पांच साल पहले ही मंजूरी मिली थी। अब इस दवा से ही गंजेपन का इलाज करने का दावा किया जा रहा है।

बालों को झडऩे से रोकने की बड़ी उपलब्धि

जर्नल ऑफ ड्रग इन डर्मेटोलॉजिस्ट में रिपोर्ट प्रकाशित हुई है। इसके मुताबिक कील-मुंहासे की दवा क्लैस्कोटेरोन को गंजे सिर पर लगाया गया था। गंजेपन के लिए जिम्मेदार हार्मोन में आश्चर्यजन रूप से कमी आई। डिहाइड्रोटेस्टेरोन नामका हार्मोन ज्यादा रिलीज होने पर हेयर फॉलिकल्स को सिकोड़ देता है। यानी लूप संकरी होने से बाल वहां से निकल नहीं पाते।

पुरुषों में गंजेपन का ज्यादातर कारण यही होता है। क्लैस्कोटेरोन दवा इस फॉलिकल्स को सिकुडऩे से बचाती है। एंड्रोजेनिक एलोपेसिया बीमारी यानी गंजेपन के मरीजों पर तीन फेज का ट्रायल हो चुका है। इससे परिणाम बहुत बेहतर आया है। अगर इसे मंजूरी मिल जाती है तो झड़ते बालों को रोकने का बड़ा इलाज साबित हो सकता है।
अब तक इसकी जो दवाइयां हैं, उसके साइड इफेक्ट्स भी काफी हैं। इसमें मूड का चिड़चिड़ापन, एंग्जाइटी और यौन उत्तेजना में कमी जैसे साइड इफेक्ट्स देखने को मिलते हंै।

यह दवा क्रीम है जिसे सिर पर लगाया जाता है। इसलिए यह सिर की कोशिकाओं को ही प्रभावित करता है। इसका मेटाबॉलिज़्म बहुत तेज़ है। इसलिए दवा शरीर में व्यापक रूप से अवशोषित हो जाती है। इसके सिस्टम-स्तर के साइड-इफेक्ट्स का जोखिम बेहद कम रहता है।