इलाहाबाद (उप्र)। सिरप से बच्चों की मौत मामले में दवा निर्माता की याचिका खारिज हो गई है। उज्बेकिस्तान में जहरीले कफ सीरप से 18 बच्चों की मौत हो गई थी। इसकी वजह माने गए सीरप निर्माता कंपनी के निदेशक व अन्य अधिकारियों को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने राहत नहीं दी है।

न्यायमूर्ति हरवीर सिंह की एकलपीठ ने मेसर्स मैरियन बायोटेक और पांच अन्य की आपराधिक पुनरीक्षण याचिकाएं खारिज कर दी हैं। निदेशक और कंपनी के अधिकारी अपराध के लिए जिम्मेदार हैं। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत से जारी समन सही है।

कंपनी पर क्या हैं आरोप?

कंपनी पर आरोप है कि उसने औद्योगिक ग्रेड प्रोपाइलीन ग्लाइकोल का इस्तेमाल किया।.यह दवाओं के निर्माण में प्रतिबंधित है। ड्रग्स इंस्पेक्टर ने नमूने लिए। जांच में एम्ब्रोनोल सीरप और डोक-1 मैक्स सीरप मानक के अनुसार नहीं थे। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 11 जनवरी 2023 को मेडिकल प्रोडक्ट अलर्ट जारी किया था। इसमें कहा गया कि इन सीरप में डाइइथाइलीन ग्लाइकोल और इथाइलीन ग्लाइकोल की अस्वीकार्य मात्रा है। यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। ग्लाइकोल के सेवन से सीएनएस, कार्डियोपल्मोनरी और रेनल फेलियर जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

कोर्ट ने माना कि लगाए गए आरोप निदेशक और अधिकारी कंपनी के कामकाज में शामिल हैं। केंद्र सरकार के अधिवक्ता ने कहा कि तकनीकी आपत्तियां सार्वजनिक स्वास्थ्य कानूनों का उल्लंघन नहीं कर सकतीं। कंपनी ने नकली टेस्ट लैब रिपोर्ट बनाई है। यह प्रकरण राज्य बनाम भजन लाल मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के दायरे में नहीं आता। कोर्ट ने याचीगण की याचिका खारिज कर दी। सीजेएम गौतम बुद्ध नगर के 19 जनवरी 2024 के संज्ञान और समन आदेश को सही ठहराया।