बेंगलुरु। कैंसर समेत कई बीमारियों की नकली दवा रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है। पुलिस और औषधि नियंत्रण विभाग की टीम ने फार्मेसी मालिक को गिरफ्तार किया है। इन पर इस नेटवर्क का हिस्सा होने का संदेह है।

कृपा हेल्थकेयर पर छापेमारी के बाद जांच तेज हो गई है। यहां से भारी मात्रा में नकली दवाइयां बरामद की गई हैं।

शक है कि इस नेटवर्क ने अस्पतालों और मेडिकल स्टोर्स को दवाएं सप्लाई की हैं। ये लगभग 50 प्रतिशत की छूट पर दी जाती थी। इस रैकेट में दवाएं अलग-अलग नामों से रीब्रांड कर बेचना शामिल था। संदेह है कि एक्सपायर दवाओं को नए कंटेनरों में रिपैक किया गया। फिर उन पर नकली लेबल लगाए गए। इनमें से कुछ लेबल ब्रांडेड फार्मा से मिलते-जुलते बनाए गए। संदेह है कि कृपा हेल्थकेयर परिसर का इस्तेमाल दवाओं के भंडारण और वितरण केंद्र के रूप में किया जाता था। यहां से मेडिकल दुकानों और क्लीनिकों में दवाएं भेजी जाती थीं।

एसआईटी प्रमुख वामसी कृष्णा ने कहा कि इस नेटवर्क के विस्तार का पता लगाना बाकी है। शक है कि वीरेश कुमार करीब पांच साल से इस फर्म को चला रहा था। वह प्रशांत नाम के व्यक्ति से जुड़ा था। उसकी पहचान नेटवर्क के मुख्य आरोपी  के रूप में की गई है। प्रशांत फिलहाल फरार है। पुलिस की टीमें उसकी तलाश कर रही हैं। इस मामले में अभी तक केवल वीरेश कुमार की ही गिरफ्तारी हुई है।

5 करोड़ की संदिग्ध नकली दवाएं जब्त

यह जांच बिदादी और डोड्डेरी इलाकों में एक फार्महाउस पर पड़े छापे से जुड़ी है। वहां 5 करोड़ की संदिग्ध नकली दवाएं जब्त की थीं। इस जब्ती में फर्जी बिल और नकली लेबल भी शामिल थे। छापेमारी के बाद, जांचकर्ताओं ने जांच का दायरा बढ़ाया। इसी जांच के आधार पर अधिकारी कृपा हेल्थकेयर और वीरेश कुमार तक पहुंचे।