नई दिल्ली। GLP-1 दवा के विज्ञापन पर भारत में तुरंत बैन लगा दिया गया है। यह आदेश ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) ने जारी किए हैं। ग्लूकागन-लाइक पेप्टाइड-1 (GLP-1) रिसेप्टर एगोनिस्ट्स के विज्ञापनों पर प्रतिबंध रहेगा। इस आदेश का मकसद उपभोक्ताओं द्वारा दवाओं के दुरुपयोग को रोकना है। साथ ही विशेष रूप से वजन घटाने के दावों को लेकर अतिरंजित प्रचार पर अंकुश लगाना है।
यह एक्शन ऐसे समय आया है जब Ozempic, Wegovy जैसी प्रमुख GLP-1 दवाओं के पेटेंट भारत में समाप्त होने वाले हैं। भारत में GLP-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट्स का बाजार बहुत तेजी से बढ़ रहा है। अनुमान है कि यह बढ़कर 2030 तक 4,500–5,000 करोड़ तक पहुंच जाएगा। 2024 में यह बाजार $115 मिलियन का था। 2030 तक $578.9 मिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है। मुख्य कारण टाइप 2 डायबिटीज और मोटापे की बढ़ती दरें हैं।
सेमाग्लूटाइड के आगामी पेटेंट समाप्ति के बाद बड़ी संख्या में जेनेरिक वर्जन आने की उम्मीद है। फाइनेंशियल ईयर 2027 तक दवाओं की कीमतें 40-50% तक गिर सकती हैं। यह नियामक प्रतिबंध इस बाजार बदलाव से पहले आया है।
GLP-1 सेगमेंट में Novo Nordisk और Eli Lilly जैसी ग्लोबल कंपनियां हावी हैं। Novo Nordisk, अपने सेमाग्लूटाइड उत्पादों के साथ अच्छी बिक्री देखी है। बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच इसकी ग्रोथ धीमी हो गई है। इसके विपरीत, Eli Lilly की tirzepatide दवाओं ने शानदार बिक्री वृद्धि दिखाई है। इसका बाजार मूल्य $960 बिलियन से अधिक हो गया है।










