नई दिल्ली। एंटीमाइक्रोबियल दवाओं के लिए अनिवार्य नीली पट्टी लेबलिंग का प्रस्ताव रखा गया है। इससे फार्मेसी काउंटरों पर उनकी पहचान आसान हो सकेगी। एएमआर की बढ़ती चुनौती से निपटने के लिए उनका विवेकपूर्ण उपयोग बढ़ाया जा सकेगा।
यह जानकारी स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने राज्यसभा में दी। उन्होंने कहा कि सरकार एएमआर की बढ़ती चुनौती से अवगत है। राष्ट्रीय कार्य योजना एएमआर 2.0 के तहत एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध के लिए निगरानी प्रणालियों को मजबूत किया है।
यह योजना स्वास्थ्य क्षेत्र में एंटीमाइक्रोबियल प्रबंधन कार्यक्रमों को बढ़ावा देती है। सीडीएससीओ दवाओं की सुरक्षा, प्रभावशीलता और गुणवत्ता को नियंत्रित करता है। दवा बिक्री और वितरण का नियंत्रण राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण द्वारा किया जाता है। एंटीमाइक्रोबियल दवाओं के नीली पट्टी लेबलिंग के लिए एक मसौदा अधिसूचना जारी की गई थी।










