नई दिल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) द्वारा जारी फार्मासिस्ट भर्ती, पदोन्नति और सेवा संबंधी नियमों को अधिकार क्षेत्र से बाहर (अल्ट्रा वायर्स) घोषित कर दिया है। मंत्रालय का कहना है कि ये नियम केंद्र सरकार की मंजूरी के बिना जारी किए गए थे, इसलिए कानून की नजर में इनका कोई अस्तित्व नहीं है।
मंत्रालय के एलाइड हेल्थ सर्विसेज (AHS) सेक्शन ने इस संबंध में एक परिपत्र जारी किया है। इसमें सभी संबंधित पक्षों से कहा गया है कि इन नियमों के आधार पर कोई भी नियामक या प्रशासनिक कार्रवाई करने से पहले मंत्रालय के इस रुख को ध्यान में रखें।
PCI ने ‘फार्मासिस्ट रिक्रूटमेंट, प्रमोशन एंड सर्विस रेगुलेशंस, 2025’ को 10 जून 2026 को भारत के राजपत्र में प्रकाशित किया था। अधिसूचना की प्रस्तावना में दावा किया गया था कि नियम केंद्र सरकार की स्वीकृति से बनाए गए हैं। मंत्रालय ने इस दावे को गलत बताया है। विधि कार्य विभाग (DoLA) की राय के अनुसार ये नियम फार्मेसी अधिनियम के दायरे से बाहर हैं और PCI के अधिकार से परे हैं।
इन नियमों में फार्मेसी सेवाओं को अलग-अलग अनुसूचियों में बांटा गया था। फार्मेसी ऑफिसर, ड्रग इंफॉर्मेशन फार्मेसी ऑफिसर और क्लिनिकल फार्मेसी के पदों को पूरी तरह सीधी भर्ती से भरने का प्रावधान था। साथ ही पहले से सेवा में मौजूद फार्मासिस्टों के पदनाम बदलने की बात भी कही गई थी। मंत्रालय के इस फैसले के बाद अब ये प्रावधान लागू नहीं होंगे।
