नई दिल्ली: कुष्ठ रोग को खत्म करने की कोशिशों के बीच एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। भारत में बच्चों में कुष्ठ रोग के मामले तय लक्ष्य से कहीं ज्यादा दर्ज किए गए हैं। वर्ष 2025-26 में बच्चों में कुष्ठ रोग के 3,832 मामले सामने आए, जो उस साल के लिए तय लक्ष्य से लगभग दोगुने हैं। कुछ बच्चों में बीमारी का देर से पता चलने के कारण गंभीर विकलांगता भी आ गई है।

देश में 91,783 नए मामले

रिपोर्ट के अनुसार, देश में कुष्ठ रोग के कुल 91,783 नए मामले दर्ज किए गए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) बच्चों में होने वाले मामलों पर खास नजर रखता है, क्योंकि इनसे पता चलता है कि समुदाय में बीमारी का संक्रमण अब भी जारी है। बच्चों में नए मामले यह संकेत देते हैं कि आसपास कोई संक्रमित व्यक्ति बिना इलाज के मौजूद है।

2027 का लक्ष्य

भारत 2027 तक जिला स्तर पर कुष्ठ रोग के प्रसार को रोकने का प्रयास कर रहा है। इसका मकसद हर जिले में लगातार पांच साल तक बच्चों में कुष्ठ रोग के नए मामलों को शून्य करना है। मौजूदा आंकड़े दिखाते हैं कि इस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए अभी काफी प्रयास की जरूरत है।

देर से पहचान और कलंक बड़ी चुनौती

त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. कबीर सरदाना के अनुसार, इस बीमारी से जुड़ा सामाजिक कलंक और देर से पहचान दो सबसे बड़ी समस्याएं हैं। आंकड़े बताते हैं कि बीमारी का सही समय पर पता नहीं चल पा रहा है। कई परिवार बदनामी के डर से त्वचा पर दाग दिखने के बावजूद जांच नहीं कराते।

कुष्ठ रोग के शुरुआती लक्षण

  • त्वचा पर हल्के रंग या लालिमा वाले दाग, जिनमें सुन्नपन हो
  • दाग वाली जगह पर गर्म-ठंडे या दर्द का एहसास न होना
  • हाथ-पैरों में झुनझुनी या सुन्नपन
  • हाथ-पैरों की मांसपेशियों में कमजोरी
  • नसों का मोटा होना या उनमें दर्द

पूरी तरह इलाज संभव, मुफ्त दवा उपलब्ध

कुष्ठ रोग एक जीवाणु से होने वाली बीमारी है, जो पूरी तरह ठीक हो सकती है। मल्टी ड्रग थेरेपी (एमडीटी) से इसका इलाज होता है, जो सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर मुफ्त उपलब्ध है। समय पर इलाज शुरू करने से विकलांगता को रोका जा सकता है और इलाज शुरू होने के बाद मरीज से संक्रमण फैलने का खतरा भी बहुत कम हो जाता है।

विशेषज्ञों की सलाह है कि त्वचा पर सुन्न दाग दिखने पर बिना झिझक नजदीकी सरकारी अस्पताल में जांच कराएं। कुष्ठ रोग छूने से नहीं फैलता और मरीजों के साथ भेदभाव करना गलत है।

स्रोत: न्यूजबाइट्स हिंदी (3 अक्टूबर 2026)