नई दिल्ली। भारतीय दवा कंपनियों को अमेरिका से बड़ी राहत मिली है। अमेरिका भेजी जाने वाली कुछ खास दवाओं पर जीरो टैरिफ लागू होगा। इससे अमेरिका को दवाएं सप्लाई करने वाले भारत के फार्मा सेक्टर को राहत मिल सकती है।
क्या हर प्रोडक्ट पर लागू होगा?
यूएस कॉमर्स डिपार्टमेंट ने यह लिस्ट जारी की है। वॉशिंगटन कुछ पेटेंटेड फार्मास्युटिकल इंपोर्ट और उनसे जुड़ी सामग्री पर 100 फीसदी टैरिफ लगा रहा है। यह छूट भारत से भेजे जाने वाले हर फार्मा प्रोडक्ट पर लागू नहीं होती है। यह खास दवाओं और सामग्री पर लागू होती है।
इसमें कौन-कौन से प्रोडक्ट शामिल हैं?
योग्य प्रोडक्ट्स में ऑरफन ड्रग्स, न्यूक्लियर दवाएं, प्लाज्मा से बनी थेरेपी, फर्टिलिटी दवाएं शामिल हैं। इनके अलावा सेल थेरेपी, जीन थेरेपी और एंटीबॉडी-ड्रग कॉन्जुगेट्स शामिल हैं। इस लिस्ट में मेडिकल काउंटरमेजर और जानवरों की सेहत से जुड़े कुछ प्रोडक्ट्स भी शामिल हैं।
कुछ खास पेटेंट वाली दवाओं और उनके इंग्रीडिएंट्स पर 100 फीसदी टैरिफ लगाया गया। यह आदेश एक लिस्ट में शामिल कंपनियों के लिए 31 जुलाई से लागू हुआ। बाकी कंपनियों पर 29 सितंबर से लागू होगा। जेनेरिक दवाओं और उनसे जुड़े इंग्रीडिएंट्स पर सेक्शन 232 के तहत दवा टैरिफ लागू नहीं होता है। यह अंतर भारत के लिए अहम है। अमेरिका को होने वाले भारतीय दवा एक्सपोर्ट का एक बड़ा हिस्सा जेनेरिक दवाओं का है। हालांकि भारतीय कंपनियां पेटेंट वाली दवाएं, एक्टिव इंग्रीडिएंट्स और खास तरह की थेरेपी वाली दवाएं भी बनाती हैं।
भारत दुनिया में जेनेरिक दवाओं के सबसे बड़े मैन्युफैक्चरर्स में से एक है। इसके साथ ही अमेरिकी हेल्थकेयर सिस्टम के लिए एक अहम सप्लायर है। भारतीय कंपनियां एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स और तैयार दवाएं भी सप्लाई करती हैं। इनका इस्तेमाल अमेरिकी अस्पताल, फार्मेसी और मरीज करते हैं।










