वडोदरा (गुजरात)। बीमा कंपनी को मेडिकल इंश्योरेंस क्लेम देने के निर्देश दिए हैं। इंश्योरेंस के बारीक नियम एक कंज्यूमर कोर्ट में आकर रुक गए। एक मरीज़ का क्लेम खारिज हो गया था। अब उसे मंज़ूरी मिल गई है। मुआवज़ा भी मिलेगा। जि़ला उपभोक्ता आयोग ने द न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी को निर्देश दिए हैं। इंद्रदत्त पांड्या द्वारा दायर मेडिक्लेम का निपटारा करने को कहा है। फैसला सुनाया कि अस्पताल की गलतियों के लिए पॉलिसीधारक को सज़ा नहीं दी जा सकती।

यह है मामला

इंद्रदत्त पांड्या का 2003 से मेडिकल इंश्योरेंस था। 2022 में उन्होंने मोतियाबिंद का ऑपरेशन करवाया। 44,700 रुपये के रीइम्बर्समेंट की मांग की। पैरामाउंट हेल्थ सर्विसेज़ एंड इंश्योरेंस ने इस क्लेम को खारिज कर दिया था।
इंश्योरेंस कंपनी ने दलील दी कि अस्पताल वडोदरा नगर निगम के तहत रजिस्ट्रेशन के नियमों को पूरा करने में नाकाम रहा। सर्कुलर के मुताबिक, 10 बेड वाली सुविधा के तौर पर योग्य नहीं था। कंपनी ने यह भी कहा कि कुछ ज़रूरी दस्तावेज़ भी मौजूद नहीं थे।

आयोग ने इस दलील को नहीं माना। निगम के नियमों का पालन करने और इंश्योरेंस की जि़म्मेदारी के बीच लकीर खींच दी। रजिस्ट्रेशन की शर्त अस्पताल और नगर निगम के बीच का मामला है। शिकायतकर्ता ने जो इलाज करवाया है, वह गैर-कानूनी नहीं हो जाता।

आदेश में कहा गया कि कॉन्ट्रैक्ट से जुड़ी जि़म्मेदारी इंश्योरेंस कंपनी और पॉलिसीधारक के बीच होती है। न कि मरीज़ और नगर निगम के अधिकारियों के बीच। इलाज करने वाले डॉक्टर के पास ज़रूरी सर्टिफिकेट थे। दस्तावेज़ों में कमी जैसी तकनीकी बातों के आधार पर क्लेम खारिज करना गलत था।

आयोग ने इंश्योरेंस कंपनी को निर्देश दिया कि वह पांड्या को 44,700 रुपये का भुगतान करे। साथ ही मानसिक उत्पीडऩ के लिए 2,000 रुपये और कानूनी खर्च के लिए 1,000 रुपये भी दे।