गुरुग्राम (हरियाणा)। नकली वेट लॉस इंजेक्शन रैकेट का बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि आरोपी अपने फ्लैट में नामी कंपनियों की नकली दवाएं बना रहा था। साथ ही ‘ToneUp’ नाम से बिना अनुमति वाले वेट लॉस इंजेक्शन भी बनाता था। आरोपी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
ChatGPT और 3D प्रिंटर का इस्तेमाल
जांच में पता चला है कि अवि शर्मा ने दवा बनाने का कोई पेशेवर कोर्स नहीं किया था। उसने ChatGPT का इस्तेमाल करके इंजेक्शन तैयार बनाने की विधि सीखी थी। पैकेजिंग को असली जैसा दिखाने के लिए वह 3D प्रिंटर का उपयोग करता था। इंजेक्शन के लिए कच्चा माल चीन से ऑनलाइन मंगाए जाते थे।
ड्रग कंट्रोल ऑफिसर अमनदीप चौहान ने बताया कि आरोपी के फ्लैट से ‘ToneUp’ इंजेक्शन की भारी मात्रा में पैकेजिंग सामग्री बरामद हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस ब्रांड को कोई मंजूरी नहीं मिली है। प्रशासन ने जनता के लिए एडवाइजरी जारी की है। बताया िक ‘ToneUp’ नाम से बिकने वाला कोई भी उत्पाद न खरीदें। इसे बेहद असुरक्षित और अस्वच्छ परिस्थितियों में बनाया गया था।
आरोपी डायबिटीज और वजन घटाने के लिए इस्तेमाल होने वाले इंजेक्शन ‘माउंजारो’ की नकली कॉपी बना रहा था। इसे दिग्गज फार्मा कंपनी एली लिली बनाती है। ड्रग कंट्रोल विभाग ने अब तक दिल्ली में डिलीवर किए गए चार नकली माउंजारो इंजेक्शन वापस मंगवाए हैं। वहीं, हैदराबाद के अधिकारियों को भी ऐसी खेप जब्त करने के निर्देश दिए हैं।










