नई दिल्ली। दवा कंपनियों को अब हर गलती पर कोर्ट के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। नई दवा नीति के तहत अगर कंपनी ने गलती मानी और सुधार किया तो जुर्माना देकर मामला निपट सकता है। वहीं झूठ, जानकारी छिपाने या नियमों की अनदेखी दोहराने पर सीधा ट्रायल होगा।
केंद्र सरकार ने दवा एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम 1940 में अपराधों के निपटारे संबंधी नियम को अधिसूचित किया है। इन नए नियमों के बारे में राज्यों को पूरी जानकारी देने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत केंद्र सरकार ने दवा कानूनों में एक नई व्यवस्था लागू की है। इसमें तकनीकी या प्रक्रियात्मक उल्लंघनों को जुर्माना देकर निपटाने का मौका मिलेगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अब हर छोटी चूक पर आपराधिक मुकदमा नहीं चलेगा।
नए नियमों के तहत यदि किसी दवा निर्माता या विक्रेता से नियमों का उल्लंघन हुआ है। साथ ही वह गलती स्वीकार कर उसे सुधारने को तैयार है। ऐसे में वह मामले को कंपाउंड कराने के लिए आवेदन कर सकता है। तय जुर्माना जमा करने के बाद आपराधिक कार्रवाई से राहत मिल सकती है। हालांकि, यह छूट केवल उन्हीं मामलों में मिलेगी, जहां मामला गंभीर प्रकृति का न हो।
जुर्माना तय समय सीमा में जमा न करने की स्थिति में मामला दोबारा सक्रिय हो जाएगा। उसे सामान्य आपराधिक केस की तरह आगे बढ़ाया जाएगा। बार-बार उल्लंघन करने वाली कंपनियों को इस व्यवस्था का लाभ नहीं मिलेगा। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि नई नीति का दुरुपयोग न हो।










