लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। फार्मेसी काउंसिल में पंजीकरण घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। मामला उत्तर प्रदेश फार्मेसी काउंसिल से जुड़ा है। इसमें 139 छात्रों ने कथित तौर पर फर्जी मार्कशीट और जाली दस्तावेजों से पंजीकरण कराया। इनमें 65 पंजीकृत फार्मासिस्ट और 75 डी-फार्मा उम्मीदवार शामिल हैं। मध्य प्रदेश के छतरपुर स्थित श्री कृष्ण विश्वविद्यालय से संबंधित फर्जी प्रमाण पत्र जमा करवाए। इस घोटाले ने राज्य के स्वास्थ्य नियामक को झकझोर दिया है। इससे सार्वजनिक सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं।

काउंसिल के रजिस्ट्रार प्रमोद कुमार त्रिपाठी ने इसकी पुष्टि की। बताया कि आवेदकों ने ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया के दौरान जाली मार्कशीट और अन्य दस्तावेज जमा किए थे। परिषद ने भारतीय फार्मेसी परिषद और उत्तर प्रदेश तकनीकी शिक्षा परिषद से दस्तावेजों की पुष्टि की।

कृष्णा विश्वविद्यालय से कुल 37 फर्जी मार्कशीट बरामद की गईं। जांच में यह भी पता चला कि 37 अन्य व्यक्ति कथित तौर पर इन जाली दस्तावेजों को बनाने और आरोपी आवेदकों को आपूर्ति करने में शामिल थे। फर्जी डिग्री और डिप्लोमा धारकों में से कई ने पीजीआई से जुड़े संस्थानों के माध्यम से पंजीकरण कराने का प्रयास भी किया था।