नई दिल्ली। एंटीबायोटिक्स दवा के मनमाने सेवन से का एएमआर का खतरा बढ़ रहा है। लोग मेडिकल स्टोर से अपनी मर्जी से एंटीबायोटिक्स खरीदते हंै। बिना जरूरत के एंटीबायोटिक्स खाने से बैक्टीरिया, वायरस, पैरासाईट और फंगस ने इन दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर ली है। इस एंटी माईक्रोबियल रेसिस्टेंस (एएमआर) को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बड़ा खतरा बताया है।
भारत में 30 फीसदी संक्रमण पर सामान्य एंटीबायोटिक्स बेअसर
कई डाक्टरों द्वारा भी एंटीमाईक्रोबियल दवाओं का दुरुपयोग किया जा रहा है। एएमआर को रोकने के लिए संक्रमण रोकना महत्वपूर्ण है। एएमआर कृषि से लेकर मांसाहार तक को प्रभावित कर हमारी खाद्य सुरक्षा को नुकसान पहुंचा रहा है।
विश्वभर में हर साल 50 लाख से अधिक मौतें AMR के कारण हो रही हैं। आईसीएमआर की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में औसतन करीब 30 प्रतिशत बैक्टीरियल संक्रमण पर अब सामान्य एंटीबायोटिक दवाएं असर नहीं दिखा रही हैं। एएमआर के कारण ईलाज की अवधि बढ़ रही है और खर्च भी अधिक हो रहा है।










