अजमेर (राजस्थान)। आयुर्वेद दवाओं की बिक्री में गिरावट दर्ज की गई है। इसके पीछे सोने-चांदी की कीमतें बढऩे का असर बताया गया है। आयुर्वेद दवाइयों में सोना, चांदी और मोती की भस्म युक्त दवाओं की बिक्री सर्वाधिक होती थी। अब इसकी बिक्री 65 फीसदी घट गई है। गरीब और मध्यम वर्ग के लिए ये दवा खरीद पाना नामुमकिन हो गाया है। ऐसे में बिना धातु की भस्म के मिलने वाली दवाएं ही मरीज ले पा रहे हैं।

अब महंगी दवाओं को सरकारी कर्मचारी ही खरीद पा रहे हैं। उन्हें सरकार की आरजीएचएस योजना का लाभ मिलता है। इसी तरह आर्थिक रूप से सम्पन्न लोग ही दवा खरीद पा रहे हैं। आमजन और गरीब की पंहुच से ये दवा पहुंच से काफी दूर हो गई है।

बसंत कुशमाकर रस आयुर्वेद की दवा धातु युक्त 3 हजार 700 रुपए की आती थी। अब यह 10 हजार 755 रुपए की आ रही है। योगेंद्र रस 1400 रुपए का था। वह अब 3 हजार रुपए का मिल रहा है। ऐसी कई दवाएं हैं, उनमें स्वर्ण या चांदी की मात्रा के अनुसार दरों में वृद्धि हुई है। सोने और चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी का असर आयुर्वेद की दवाओं पर भी पड़ रहा है। 60 फीसदी बिक्री धातु मिश्रित दावों की कम हो गई। बिक्री कम होने के कारण खरीद भी कम कर दी है।