शिमला (हिमाचल प्रदेश)। सिम्बायोसिस फार्मा को 43.68 लाख पर्यावरण जुर्माना देना होगा। अपीलीय प्राधिकरण ने मैसर्स सिम्बायोसिस फार्मा की अपील खारिज कर दी है। कंपनी पर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से लगाया गया 43 लाख रुपये का पर्यावरण जुर्माना लागू रहेगा।

यह है मामला

राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कंपनी की औद्योगिक इकाई के एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट की जांच की थी। इस दौरान आउटलेट से लिए सैंपल में प्रदूषण का स्तर तय मानकों से अधिक पाया था। बोर्ड के अनुसार यह जल प्रदूषण नियमों का लगातार और पुष्टि के साथ उल्लंघन था। इस आधार पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कंपनी पर पर्यावरण जुर्माना लगाया।

कंपनी ने आदेश को चुनौती देते हुए राज्य सरकार के अपीलीय प्राधिकरण के समक्ष अपील दायर की। इसमें जुर्माना रद्द करने की मांग की गई। बोर्ड का तर्क था कि ऐसे निर्देशों के खिलाफ अपील का अधिकार केवल राष्ट्रीय हरित अधिकरण को है।

दलीलें सुनने के बाद अपीलीय प्राधिकरण ने कहा कि पहले अधिकार क्षेत्र का प्रश्न तय करना जरूरी है। पर्यावरण से जुड़े मामलों पर इस प्राधिकरण को सुनवाई का अधिकार नहीं है। इसी आधार पर अपील को सुनवाई योग्य न मानते हुए खारिज कर दिया। अब सिम्बायोसिस फार्मास्यूटिकल्स को लगाया गया 43.68 लाख का पर्यावरण जुर्माना देना होगा।