नई दिल्ली। दवा लाइसेंस को लेकर सरकार सख्त नियम बना रही है। अक्सर देखा जाता है कि दवा कंपनियां केमिकल या पैकेजिंग में बदलाव कर देती हैं। अब ऐसा करना उन्हें भारी पड़ सकता है। दरअसल, केंद्र सरकार ने इसके लिए नियम में बदलाव की तैयारी शुरू कर दी। अब दवा की मैन्युफैक्चरिंग प्रक्रिया, पैकेजिंग आदि में बदलाव के लिए कंपनी को इसकी लिखित सूचना लाइसेंसिंग अथॉरिटी को देनी होगी।

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने संशोधन के लिए मसौदा जारी किया है। अब इन प्रस्तावित नियमों पर 30 दिनों के भीतर जनता से आपत्तियां और सुझाव मांगे गए हैं।  दवा निर्माण में होने वाले बदलावों को तीन स्तरों में वर्गीकृत किया है। अगर कंपनी दवा बनाने की प्रक्रिया में बदलाव करना चाहती है तो इसे लेवल 1 में रखा गया है। इसके लिए कंपनी को सीडीएससीओ या राज्य ड्रग प्राधिकरण से अनुमति लेनी होगी।

लेवल टू में शामिल ये बदलाव

लेवल टू में मध्यम बदलाव को शामिल किया गया है। कंपनी टैबलेट की कोटिंग में बदलाव करना चाहती है तो भी उसे लाइसेंसिंग अथॉरिटी से अनुमति चाहिए होगी। लेवल थ्री में छोटे बदलाव को रखा गया है। दवा कंपनी अगर टैबलेट की ब्लिस्टर पैक की डिजाइन, पैकेजिंग का रंग या लेबल डिजाइन बदल दे तो बिना पूर्व अनुमति लिए कर सकती है। हालांकि उसे किसी भी परिवर्तन की जानकारी 30 दिन के अंदर लाइसेंसिंग अथॉरिटी को लिखित में देनी होगी।