बेंगलुरु। दवा लाइसेंस निलंबन मामले में वीवा फार्मा को कोर्ट से राहत मिली है। कर्नाटक उच्च न्यायालय ने वीवा फार्मा द्वारा दायर एक रिट याचिका का निपटारा किया। इसमें एफएसडीए अधिकारियों द्वारा उसके दवा लाइसेंस के निलंबन को चुनौती दी गई थी। न्यायालय ने कहा कि लाइसेंसिंग प्राधिकरण को औषधि निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना चाहिए। इसमें रद्द करने का आदेश पारित करने से पहले लाइसेंसधारक को कारण बताने का अवसर प्रदान करना चाहिए।

वीवा फार्मा ने नोटिस-सह-निलंबन आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। उसके औषधि लाइसेंस निलंबित कर दिए गए थे। याचिकाकर्ता ने निलंबन को रद्द करने की मांग की। तर्क दिया कि किसी भी अवैध गतिविधि में उसकी संलिप्तता साबित किए बिना दवा लाइसेंस निलंबित नहीं किया जा सकता। रजिस्ट्री ने बेंगलुरु में रिट याचिका दायर किए जाने पर आपत्ति जताई। क्योंकि याचिकाकर्ता का कारोबार बेलगावी में है। रिट याचिका धारवाड़ बेंच के समक्ष प्रस्तुत की जानी चाहिए थी। याचिकाकर्ता ने बताया कि बेंगलुरु अपीलीय प्राधिकरण के समक्ष अपील स्वीकार नहीं की गई। इस कारण उसे उच्च न्यायालय का रुख करना पड़ा। याचिकाकर्ता एक अधिकृत दवा वितरक है। न्यायालय ने गौर किया कि लाइसेंसिंग प्राधिकरण को किसी दवा का लाइसेंस रद्द करने से पहले कारण बताने का अवसर प्रदान करना जरूरी है।

आरोप अधिकृत आपूर्तिकर्ता फाइजर से ज़ैविसेफ़्टा इंजेक्शन की खरीद-बिक्री से संबंधित था। हालांकि, न्यायालय ने अपनाई गई प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित किया। कोर्ट ने पाया कि किसी दवा के लाइसेंस को रद्द करने से पहले कारण बताने का अवसर प्रदान करना अनिवार्य है।