नकली दवा निर्माण का गढ़ बना बद्दी, देशभर में हो रहीं सप्लाई

बद्दी (हिमाचल)। नकली दवा निर्माण के मामले में बद्दी शहर गढ़ साबित हो रहा है। देशभर में सप्लाई होने वाली ज्यादातर नकली दवाओं की कंपनियां यहीं पर स्थित हैं। ये फार्मा बेहद कम दामों पर आपके बताए नाम पर दवा बनाकर देने को हर पल तैयार हैं। यही कारण है कि यहां से ज्यादातर ब्रांडेड के नाम पर नकली दवाइयां बनाकर सपलाई की जा रही हैं।

22 कंपनियों के 25 सैंपल फेल मिले

मुख्यमंत्री नि:शुल्क दवा योजना में बीते चार माह में 22 कंपनियों के 25 सैंपल फेल मिले हैं। सरकार ने इन दवाओं की बिक्री पर रोक लगा दी है। औषधि विभाग ने भी 6 महीने में मेडिकल स्टोरों से दवाओं के 457 सैंपल लेकर जांच कराई तो 15 सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतरे। खास बात यह है कि इनमें ज्यादातर दवाएं हिमाचल प्रदेश के बद्दी शहर की फार्मा कंपनियों ने बनाई थीं।

बेहद कम दामों पर बना रहे दवा

निरीक्षण के दौरान पता चला कि जुकाम-बुखार में काम आने वाली डाइक्लोपेरा साल्ट की एक गोली जो बाजार में जो 5-6 रुपए में मिलती है, उसे बद्दी की फार्मा आपके नाम से 50 पैसे में बनाकर देने को तैयार मिलीं। वहीं, एसिडिटी की पेंटाप्राजोल टेबलेट भी 57 से 69 पैसे में बनाने की बात कही गई। जबकि यह दवा बाजार में 4 से 10 रुपए में एक मिलती है।

इनके अलावा, डाइक्लोपेरा 55 पैसे, निमूपैरा 52 पैसे, डोलो-650 एमजी 65 पैसे, पैंटाप्राजोल टेबलेट 69 पैसे तथा डाइक्लो जेल 12 रुपए में बनाकर देने का दावा किया गया। यही नहीं, बद्दी की कंपनियां 90 से 120 रुपये कीमत वाला डाइक्लो जेल मात्र 12 रुपये में बनाकर दे रहीं हेैं।

एक एड्रेस पर कई-कई प्लांट का फर्जीवाड़ा

कार्रवई से बचने के लिए शहर में एक ही पते पर कई-कई प्लांट चल रहे हैं। एफएमसीजी और अन्य के 3120 प्लांट हैं। इनमें 700 से ज्यादा तो फार्मा कंपनियों के हैं। शायद ही ऐसा कोई शीर्ष ब्रांड होगा, जिसका प्लांट बद्दी में नहीं हो।
गौरतलब है कि मई 2024 में नि:शुल्क दवा योजना में 10 दवाओं पर बैन लगा था।

नकली दवा

राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन ने 10 दवाओं के सैंपल फेल मिलने पर 8 कंपनियों को इनकी सप्लाई के लिए रोका था। करीब चार माह पहले भी 14 कंपनियों की 15 दवाओं में घटिया लेवल का साल्ट मिला था, जिन पर प्रतिबंध लगाया गया था। इनमें काफी दवाएं बद्दी से सप्लाई हो रही थीं। सहायक औषधि नियंत्रक अशोक मित्तल ने बताया कि इस साल 1 जनवरी से 30 जून तक दवा दुकानों से 457 सैम्पल लेकर उनकी जांच करवाई तो उनमें से 15 सैंपल फेल मिले हैं।

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