एंटीबायोटिक एस (+) एटोडोलैक+पैरासिटामोल को दोबारा बैन की सिफारिश

नई दिल्ली। एंटीबायोटिक एस (+) एटोडोलैक+पैरासिटामोल को एक बार फिर से बैन की सिफारिश की है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के औषधि तकनीकी सलाहकार बोर्ड (डीटीएबी) ने एक उप-समिति की रिपोर्ट पर विचार करने के बाद इस दर्द निवारक दवा के निर्माण, बिक्री और वितरण पर रोक लगाने की सिफारिश की।

गौरतलब है कि डीटीएबी ने पहले भी इस दवा पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की थी। लेकिन इसके निर्माता एमक्योर फार्मास्यूटिकल्स ने इस निर्णय के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय की शरण लेकर बिे्रैन करने की सिफारिश को रुकवा दिया था।

कोर्ट के आदेश के बाद डीटीएबी ने फार्माकोलॉजी विभाग, एलसीएमएच अस्पताल, नई दिल्ली के निदेशक, प्रोफेसर डॉ. ललित कुमार गुप्ता और क्लिनिकल फार्माकोलॉजी, ऑर्थोपेडिक्स और मेडिसिन के एक-एक विशेषज्ञ की अध्यक्षता में एक उप-समिति का गठन किया।

डीटीएबी की बैठक में कहा गया कि उप-समिति के निष्कर्षों को विस्तृत किए बिना बोर्ड ने निष्कर्ष निकाला है। डीटीएबी ने मामले पर विचार-विमर्श किया और एफडीसी दवा एस (+) एटोडोलैक + पेरासिटामोल के मानव उपयोग के लिए निर्माण, बिक्री और वितरण पर रोक लगाने पर सहमति व्यक्त की।

बता दें कि केंद्र सरकार ने 7 सितंबर, 2018 को देश में विभिन्न कंपनियों द्वारा बनाई गई एफडीसी एटोडोलैक + पेरासिटामोल और एमक्योर के एस (+) एटोडोलैक + पेरासिटामोल संयोजन पर प्रतिबंध लगा दिया था। इनहें मनुष्य के लिए जोखिम करार दिया गया था।

उप-समिति ने सिफारिश की कि 343 एफडीसी को प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। शेष में से तीन को विशिष्ट संकेतों के लिए प्रतिबंधित करने की आवश्यकता है। तीन अन्य को सामग्री की विशिष्ट मात्रा/शक्ति और विशिष्ट संकेतों तक सीमित करने की जरूरत है।

उच्च न्यायालय ने एटोडोलैक + पेरासिटामोल संयोजन के लिए दायर याचिकाओं को बिना किसी योग्यता के पाते हुए खारिज कर दिया। एमक्योर ने तर्क दिया कि एफडीसी में एस का मतलब चिरल है। यह शुद्ध रूप है। एस(+) एटोडोलैक रेसमेट एटोडोलैक का औषधीय रूप से सक्रिय घटक है।

एस (+) एटोडोलैक की सूजन-रोधी, एनाल्जेसिक और ज्वरनाशक गतिविधियाँ साइक्लोऑक्सीजिनेज-2 के अवरोध के कारण देखी गई हैं। इसके परिणामस्वरूप प्रोस्टाग्लैंडीन संश्लेषण में अवरोध होता है। यह तर्क दिया गया कि एस (+) एटोडोलैक के एटोडोलैक की तुलना में विभिन्न फायदे हैं।

न्यायालय ने कहा कि उप-समिति ने एफडीसी के लिए कंपनी द्वारा किए गए नैदानिक परीक्षण पर विचार नहीं किया है। इसकी रिपोर्ट ने स्पष्ट रूप से प्रासंगिक सामग्री को नजरअंदाज कर दिया होगा, जिससे यह चुनौती के लिए अतिसंवेदनशील हो जाएगी।

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