ड्रग्स पर कंट्रोल करने में एनडीपीएस एक्ट फेल

चंडीगढ़। पंजाब में नशे की बिक्री को रोकने में एनडीपीएस एक्ट बुरी तरह विफल रहा है। विधि-सेंटर फॉर लीगल पॉलिसी नाम के एनजीओ की ओर से पंजाब में ड्रग्स की समस्या पर किए गए एक सर्वेक्षण के बाद जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि पंजाब में एनडीपीएस एक्ट अपने दोनों लक्ष्यों को हासिल करने में नाकामयाब रहा है। इसलिए नशे के सेवन को अपराध बनाने के नियमों का पंजाब में विपरीत परिणाम सामने आए हैं। न तो इससे नशे के प्रसार पर रोक लगी है और न ही नशे के पीडि़तों का पुर्नवास हो पाया है।
अडिक्ट टू कनविक्ट-वर्किग ऑन एनडीपीएस एक्ट इन पंजाब नाम से किए गए इस सर्वेक्षण के बाद विधि सेंटर फॉर लीगल पॉलिसी ने पंजाब सरकार को इस दिशा में कई सुझाव दिए हैं। इसमें नशे के उपयोग को गैर-आपराधिक दोष बनाए जाने की सिफारिश की है।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश मुकुल मुदगल, पूर्व सासद सलमान खुर्शीद, पूर्व अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केवी विश्वनाथ, सीबीआइ के पूर्व विशेष निदेशक बलविंदर सिंह और नेशनल ड्रग निर्भरता उपचार केंद्र के प्रमुख डॉ. आरके चड्ढा समेत कई गणमान्यों ने दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में इस रिपोर्ट को जारी किया।
एनजीओ की सीनियर रेजिडेंट फेलो नेहा सिंघल ने बताया कि नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटांस (एनडीपीएस) एक्ट पंजाब में प्रभावी सिद्ध नहीं हो रहा है। पंजाब के 18 जिलों में किए गए इस अध्ययन से यह बात स्पष्ट हो गई है कि पंजाब में नशे के प्रसार को रोकने के लिए वैधानिक और नीतिगत बदलाव लाए जाने की जरूरत है। वर्ष 2013 में पंजाब में ड्रग्स अपराध से जुड़े मामलों की संख्या 34,688 थी, जबकि देश के अन्य सभी राज्यों में यह संख्या मात्र 14,564 थी। उन्होंने राज्य के 18 जिलों से जुटाई जानकारी के आधार पर यह बात सामने आई है कि पंजाब में वर्ष 2013 से 2015 तक एनडीपीएस के तहत अदालतों में आए कुल मामलों में 71.4 फीसद मामलों में शामिल आरोपितों की उम्र 20 से 40 वर्ष तक थी। इनमें से 40 फीसद की आयु 20 से 30 वर्ष की थी।
इस सर्वे को अंजाम देने वाले एनजीओ ने अदालती प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि फार्मास्यूटिकल दवाओं के मामले में औसतन सजा दस साल होती है, लेकिन पंजाब में यह सजा औसतन तीन माह तक ही देखी गई है। नेहा का कहना है कि नशे के मामलों से संबंधित सभी मामले एक ही मंत्रालय के अधीन लाए जाने से भी इस दिशा में बेहतर प्रतिक्रिया मिल सकती है।

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