पैरासिटामॉल दवा की निर्माण लागत 40 फीसद तक बढ़ी

 नई दिल्ली। चीन में कोरोना वायरस का असर अब भारत के दवा उद्योग पर दिखाई देने लगा है। दवा निर्माण की लागत पिछले 15 दिनों में 40 फीसद तक बढ़ गई है। सरकार 58 अति जरूरी दवाओं की कीमतों पर लगातार निगरानी रख रही है ताकि जरूरत पर उनके निर्यात पर रोक लगाई जा सके। गौरतलब है कि दवा बनाने के लिए 70 फीसद कच्चे माल का आयात चीन से किया जाता है।
फेडरेशन ऑफ फार्मा एंटरप्रेन्योर्स (एफओपीई) के कार्यकारी सचिव सुदेश कुमार ने बताया कि पिछले 15 दिनों में फार्मा निर्माण की लागत 30-40 फीसद तक बढ़ गई है। दवा की अधिकतम कीमतों पर सरकारी नियंत्रण की वजह से फिलहाल उपभोक्ता तक पहुंचने वाली दवा के दाम में बढ़ोतरी नहीं हुई है। लेकिन ऐसा अधिक दिनों तक नहीं चल सकता, क्योंकि फार्मा कंपनियां लागत का दबाव महसूस करने लगी हैं। ऐसे में सरकार दवा कंपनियों को कुछ प्रोत्साहन दे सकती है। सूत्रों के मुताबिक सरकार दवा कंपनियों को कर्ज की ब्याज दरों में छूट या फिर कच्चे माल के दाम में बढ़ोतरी के अनुपात में कुछ फीसद सब्सिडी दे सकती है।
एफओपीआई के मुताबिक चीन में कोरोना वायरस के कारण दूसरे देशों से कच्चा माल खरीदने के विकल्प पर विचार किया जा रहा है। इनमें सिंगापुर, वियतनाम, इटली, स्पेन जैसे देश शामिल हैं। इन देशों से कच्चे माल का आयात चीन के मुकाबले 20-25 फीसद तक महंगा है। ऐसे में, सरकार महंगे आयात में राहत देने का कुछ उपाय कर सकती है। हिमाचल प्रदेश ड्रग मैन्यूफैक्चरिंग एसोसिएशन के चीफ एडवाइजर सतीश सिंघल ने बताया कि यह सही है कि दवा निर्माण की लागत 40 फीसद तक बढ़ गई है, लेकिन कुछ दवाओं के कच्चे माल में 70-80 फीसद तक का इजाफा है। पैरासिटामॉल के कच्चे माल का दाम जनवरी में 250 रुपये प्रति किलोग्राम था, जो अभी 410 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया है। अजीथ्रोमाइसिन के कच्चे माल की कीमत 6,500 रुपये प्रति किलोग्राम से बढक़र 12,000 रुपये प्रति किलोग्राम हो चुकी है। वहीं, मोंटालुकास्ट के कच्चे माल का दाम 30,000 से बढक़र 55,000 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गया है। दिक्कत यह है कि अन्य देशों में भी दवा के कच्चे माल की किल्लत है। कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स के उत्पादन पर भी कोरोना वायरस का असर देखा जा सकता है। कॉस्मेटिक्स के एक उत्पाद के निर्माण में कई कच्चे माल का इस्तेमाल होता है। चीन से कच्चे माल की सप्लाई बाधित होने से कई कॉस्मेटिक उत्पादों के निर्माण पर असर पड़ा है।

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