फार्मासिस्ट भर्ती में फर्जीवाड़े का मामला पकड़ में आया, जांच करने वाले भी हैरान

जयपुर (राजस्थान)। फार्मासिस्ट भर्ती में भारी फर्जीवाड़े का मामला पकड़ में आया है। इस मामले की जांच करने वाले भी हैरान हैं। गौरतलब है कि राजस्थान फार्मासिस्ट भर्ती 2023 के लिए अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की जांच की अंतरिम रिपोर्ट आ चुकी है।

ड्रग कंट्रोलर ने 20 से अधिक टीमें बनाकर प्रदेश के निजी विश्वविद्यालयों और बाहर के सरकारी व निजी विश्वविद्यालयों से उत्तीर्ण कर आए अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की जांच की थी। जांच में हैरान करने वाले मामले सामने आए हैं। जांच में कुल एक हजार 115 अभ्यर्थियों के दस्तावेज सही पाए गए हैं लेकिन 112 फार्मासिस्ट अभ्यर्थियों के दस्तावेज संदेह के घेर में आए हैं। वहीं, 301 अभ्यर्थियों की जांच प्रक्रियाधीन है।

यह है मामला

ड्रग कंट्रोलर अजय फाटक ने बताया कि राज्य स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संस्थान ने भर्ती के अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की जांच का काम सौंपा था। इसकी रिपोर्ट सौंप दी गई हैं। 10 यूनिवर्सिटी ने सर्टीफिकेट जारी नहीं करने की बात कही है। पांच यूनिवर्सिटी ने मार्कशीट को संदेहास्पद माना है। जांच में सामने आया कि राजस्थान फार्मेसी काउंसिल और मेघालय की सीएमजे यूनिवर्सिटी ने 3 फार्मासिस्टों के फर्जी रजिस्ट्रेशन किए। इसका पता चलने पर राजस्थान फार्मेसी काउंसिल ने इनके रजिस्ट्रेशन कैंसिल भी कर दिए।

अभ्यर्थी ने नंबर बढ़ाकर दस्तावेज किए पेश

रिपोर्ट में सामने आया कि एक अभ्यर्थी ने नंबर बढ़ाकर दस्तावेज पेश कर दिए। वहीं एक अन्य का हिमाचल की यूनिवर्सिटी में नाम सही नहीं मिला है। इसी तरह भोपाल की एक यूनिवर्सिटी ने बताया कि 3 अभ्यर्थियों की मार्कशीट उन्होंने दी ही नहीं है। मध्यप्रदेश के एक अभ्यर्थी ने सागर की एक यूनिवर्सिटी फेक मार्कशीट पेश कर दी। उड़ीसा की एक अभ्यर्थी की मार्कशीट को भी सही नहीं माना गया। यूपी के मुरादाबाद की यूनिवर्सिटी में एक अभ्यर्थी का रिकॉर्ड ही नहीं मिला।

25 मार्कशीट सत्यापित नहीं मिली

यूपी की वीर बहादुर पूर्वांचल यूनिवर्सिटी, हिमाचल प्रदेश की आईईसी यूनिवर्सिटी और रांची की वाईबीएन यूनिवर्सिटी में अभ्यर्थियों के रिकॉर्ड नहीं मिले हैं। वहीं, चित्तौड़ की मेवाड़ यूनिवर्सिटी की एक मार्कशीट को भी संदेहास्पद माना है। चूरू की ओपीजेएस यूनिवर्सिटी ने 27 अभ्यर्थियों के दस्तावेज अग्नि हादसे में नष्ट होने की बात कही है।

इसके अलावा झुंझुनूं के सिघांनिया यूनिवर्सिटी ने 9 अभ्यर्थियों के रिकॉर्ड नहीं दिए। वहीं मेघालय की विलियम कैरी यूनिवर्सिटी से पास हुए 25 अभ्यर्थियों की मार्कशीट सत्यापित नहीं पाई गई।

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