शेड्यूल-नॉन शेड्यूल दवाओं पर मांगा अधिक मुनाफा 

अंबाला। देशभर में 8.5 लाख केमिस्टों के अखिल भारतीय संगठन आल इंडिया ओर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट्स (एआईओसीडी) ने फार्मास्यूटिकल्स विभाग (डीओपी) से थोक और खुदरा व्यापार मार्जिन को 10 प्रतिशत और 20 प्रतिशत निर्धारित करने के लिए आग्रह किया है। एआईओसीडी ने डीओपी से अपील की है कि शेड्यूल दवाओं के लिए पहले बिक्री बिंदु यानी स्टाकिस्ट, थोक व्यापारी, वितरक या अस्पताल पर अधिकतम व्यापार मार्जिन होना चाहिए और 30 फीसदी नॉन शेड्यूल दवाओं के लिए। सरकार को ड्रग प्राइस कंट्रोल ऑर्डर (डीपीसीओ) 2013 में संशोधन करने की आवश्यकता है। वर्तमान में, अनुसूचित दवाओं (मूल्य नियंत्रण दवाओं) पर थोक और खुदरा व्यापार मार्जिन क्रमश: 8 फीसदी और 16 फीसदी पर है, जबकि गैर अनुसूचित दवाओं के लिए, थोक और खुदरा व्यापार मार्जिन क्रमश: 10 फीसदी और 20 फीसदी है। इन व्यापार मार्जिन के आधार पर, नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (एनपीपीए) दवा की कीमत तय करती है।
एआईओसीडी का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही थोक विक्रेताओं और खुदरा विक्रेताओं के लिए उपरोक्त व्यापार मार्जिन मांगने के लिए डीओपी से मिलने के लिए तैयार है। एआईओसीडी के अध्यक्ष जेएस शिंदे ने कहा कि व्यापार मार्जिन दो दशकों पहले तय किया गया है। जीवन स्तर में वृद्धि और वर्षों में परिचालन लागत में वृद्धि के चलते व्यापार मार्जिन को संशोधित करने की जरूरत है। उचित संशोधित मार्जिन केमिस्टो को समुदाय की सेवा करने में मदद करेगा। नीति आयोग का प्रस्तावित व्यापार मार्जिन वह है जो हम अब प्राप्त कर रहे हैं। वर्तमान में निर्धारित दवाओं के लिए हमारा व्यापार मार्जिन बहुत कम है। इसलिए हमने थोक विक्रेताओं के लिए 10 फीसदी के मार्जिन और खुदरा विक्रेताओं के लिए 20 फीसदी, एमआरपी पर दवाइयों और संबद्ध उत्पादों की सभी श्रेणियों में भारत में निर्मित होने की मांग भी की।
मेडिकेयर न्यूज से बात करते हुए एआईओसीडी के महासचिव राजीव सिंघल, ने कहा कि व्यापारी दवाओं की उच्च कीमतों के लिए जिम्मेदार नहीं है क्योंकि कीमतें सरकार या निर्माताओं द्वारा तय की जाती हैं। दवा व्यवसाइयों को जहां मुनाफा पचाने की आदत डालनी होगी वहीं अपने व्यापारिक स्थल को आधुनिक बनाना होगा, जो समय की मांग भी है। महासचिव ने कहा कि हम लंबे समय से थोक विक्रेताओं के लिए 10 प्रतिशत के व्यापार मार्जिन और दवाइयों की सभी श्रेणियों पर दवाओं की सभी श्रेणियों पर एमआरपी पर खुदरा विक्रेताओं के लिए 20 प्रतिशत का मार्जिन मांग रहे हैं अर्थात शेड्यूल एवं नान शेड्यूल दवाओं पर। वर्तमान में मूल्य नियंत्रण श्रेणी के तहत 861 दवाइयां हैं। इन दवाओं पर व्यापार मार्जिन बहुत कम है और दवा व्यापार समुदाय की आजीविका पर अब प्रश्नचिन्ह लग रहा है । इसका कारण उपभोक्ताओं को 3 से 5 प्रतिशत छूट की पेशकश से केमिस्टों में गलाकाट प्रतिस्पर्धा के कारण मार्जिन में कटौती हुई है।

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