सन फार्मा ने दी सफाई तो चढ़ गए शेयर

मुंबई। सन फार्मा के मैनेजमेंट ने इनवेस्टर अपडेट जारी कर बताया कि व्हिसल ब्लोअर की तरफ से कथित तौर पर उठाए गए कॉरपोरेट गवर्नेंस संबंधी मसलों के समाधान के लिए उसने क्या कदम उठाए हैं। इस सफाई के बाद सन फार्मा के शेयर 5 पर्सेंट चढ़ गए। मैनेजमेंट ने कहा कि डोमेस्टिक फॉम्र्यूलेशन डिस्ट्रीब्यूशन बिजनेस की मालिक आदित्य मेडिसेल्स के बजाय सन फार्मा की 100 पर्सेंट हिस्सेदारी वाली सब्सिडियरी होगी। कंपनी ने 2,238 करोड़ के कर्ज सौदों को वापस ले लिया और उसने सब्सिडियरी कंपनियों के ऑडिटर भी बदले। मार्केट एनालिस्टों ने कंपनी की 3 दिसंबर की इनवेस्टर कॉल में जो चिताएं जाहिर की थीं, उन्हें दूर करने के लिए कंपनी ने ये कदम उठाए हैं।
हालांकि इनकी वजह से इस बीच कंपनी के मार्केट कैप में 10 हजार करोड़ की गिरावट आ चुकी है। अगर मैनेजमेंट ने 3 दिसंबर की इनवेस्टर कॉल के तुरंत बाद ये बदलाव किए होते तो सन फार्मा के शेयर प्राइस में इतनी गिरावट नहीं आती। दरअसल, पिछले सात हफ्तों में शेयर बाजार में जो हुआ, उसकी वजह से कंपनी ये बदलाव करने को मजबूर हो गई। कंपनी के दो इनवेस्टर अपडेट के बीच इसके मार्केट कैप में 10 हजार करोड़ से अधिक की गिरावट आ चुकी है।
क्या इस अपडेट के बाद सन फार्मा के निवेशकों की फिक्र दूर हो जाएगी? कंपनी ने कॉरपोरेट गवर्नेंस संबंधी मसलों पर कदम उठाकर इसकी शुरुआत कर दी है। भविष्य में कंपनी के ट्रांजेक्शंस, मैनेजमेंट रेम्यूनरेशन और रिलेटेड पार्टी ट्रांजेक्शंस पर मार्केट एनालिस्टों की करीबी नजर रहेगी। कंपनी ने इस विवाद के चलते साख भी गंवाई है और मैनेजमेंट इसे तुरंत हासिल नहीं कर पाएगा। इस बीच, व्हिसल ब्लोअर की कंप्लेंट की पूरी सचाई निवेशकों के सामने नहीं आई है। सेबी ने भी इन शिकायतों पर चुप्पी नहीं तोड़ी है। इसलिए कंपनी के दिसंबर क्वॉर्टर के रिजल्ट और उसके बाद मैनेजमेंट कमेंटरी से सन फार्मा के शेयर प्राइस की चाल तय होगी। यही उसके लिए अगला ट्रिगर होगा।
दिलचस्प बात यह भी है कि जब कॉरपोरेट गवर्नेंस संबंधी मसलों के चलते कंपनी के शेयर प्राइस में गिरावट आ रही थी, तब अधिक से अधिक मार्केट एनालिस्ट इसके शेयर पर बुलिश हो रहे थे। अलबत्ता, उन्होंने इसके टारगेट प्राइस में कटौती की है। पिछले सात हफ्तों में सन फार्मा पर बाय रेटिंग में करीब 30 पर्सेंट की बढ़ोतरी हुई है, जबकि टारगेट प्राइस में 5 पर्सेंट की कटौती। ब्लूमबर्ग के डेटा के मुताबिक, कंपनी को ट्रैक करने वाले 41 में से 22 एनालिस्टों ने इसे बाय रेटिंग दी है और एवरेज टारगेट प्राइस 540 रुपए का दिया है।

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