हजारों दवा कारोबारियों की बढ़ी मुश्किलें, 5 हजार केमिस्ट शॉप के अस्तित्व पर संकट

प्रयागराज। हजरों दवा दुकानदारों के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है। दवा दुकानदारों की मुश्किलें दिन प्रति दिन बढ़ती ही जा रही हैं। बताना लाजमी है कि ड्रग रीन्युअल एंड रिटेंशन नियम लागू किया गया है जिससे लगभग पांच हजार दवा कारोबारियों की मुश्किलें इन दिनों बढ़ती हुई नजर आ रहीं हैं। बता दें कि प्रदेश में ड्रग रीन्युअल एंड रिटेंशन नियम लागू हुआ है। इसके तहत दवा की दुकानों को चलाने वाले कारोबारियों को ड्रग लाइसेंस का रिन्युअल कराने के लिए फीस के साथ ही मेडिकल स्टोर्स का ब्योरा देना होगा। दुकान, मकान के मालिक खुद नहीं हैं तो मकान मालिक से रजिस्टर एग्रीमेंट की हुई कॉपी और उनका नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट लगाना होगा। एग्रीमेंट और एनओसी जरूरी है, इसके बगैर रीन्युअल नहीं हो रहा है। इससे दवा दुकानों के अस्तित्व पर संकट गहरा गया है। इस नए प्रावधान से पांच हजार से अधिक दवा दुकानों पर संकट गहरा गया है। बहुत सारी दुकानें 20, 30 सालों से किराए पर हैं।

मकान मालिकों से विवाद है। कई सोसाइटी की हैं तो कई वक्फ आदि संपत्ति की हैं। कुछ में मकान मालिकों के बीच ही केस चल रहा है। ऐसे में रजिस्टर एग्रीमेंट और एनओसी मिल नहीं रही। कुछ मकान मालिकों ने इस मुद्दे को देख किराया दोगुना करने की तैयारी कर ली। ऐसे दुकानदारों के बीच खींचतान, रीन्युअल का मामला विवाद पैदा कर रहा है। कारोबारी संगठनों ने इस मामले को मंत्रियों तक पहुंचाया है। फूड एवं औषद्यि प्रशासन के अधिकारियों के पास यह परेशानी पहुंचाई गई है। उत्तर प्रदेश केमिस्ट एण्ड डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन ने इस मामले को मुख्यमंत्री तक पहुंचाया है। महामंत्री राजेंद्र सैनी से बातचीत के बाद प्रयाग केमिस्ट एसोसिएशन फुटकर ने डीएम के मार्फत सीएम को ज्ञापन भेजा है। कारोबारी संगठनों का कहना है कि इस नए प्रावधान से ड्रग लाइसेंस रीन्युअल नहीं हो पा रहा है। ऐसे में जुर्माना राशि भी देनी पड़ सकती है। अध्यक्ष लालू मित्तल के मुताबिक, इस संबंध में औषद्यि प्रशासन के अधिकारियों से दवा कारोबारियों की बैठक हुई लेकिन वह भी असहाय हैं। उनका कहना है कि इस नियम में वह कोई बदलाव नहीं कर सकते। संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि इसकी जद में पांच हजार से अधिक दुकानें आ रही हैं।

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