हलचल: देश की तमाम फार्मा कंपनियों को एनपीपीए का नोटिस

नई दिल्ली: नेशनल फार्मास्यूटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (एनपीपीए) ने कहा कि भारत में तमाम फार्मा कंपनियां नियामक की मंजूरी बिना दवाओं के दाम तय कर बाजार में उतार रही हैं। एनपीपीए की सूची में ऐसी 200 दवाएं हैं, जिनमें फिक्स्ड डोज कंबिनेशन (एफडीसी) और बड़ी दवा कंपनियां शामिल हैं। एनपीपीए ने दवा कंपनियों को भेजे कारण बताओ नोटिस में कहा है कि  यह स्पष्ट नहीं है कि इन फॉम्युलेशंस को केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) से मंजूरी मिली है या नहीं और क्या ये दवाएं कंबिनेशन वाली दवा के रूप में तार्किक हैं या नहीं। कंपनियोंं को 15 जून तक का वक्त दिया गया है, उसके बाद कार्रवाई होगी।
           उधर, उद्योग संगठन इंडियन फार्मास्यूटिकल्स एलायंस के महासचिव डीजी शाह ने एक बयान जारी कर कहा कि संगठन उन कंपनियों के नाम का इंतजार करेगा, जिनके बारे में नियामक ने बताया है। एनपीपीए के नोटिस में दवा कंपनियों पर आरोप लगाया गया है कि फॉम्युलेशन में बदलाव किया गया है, जो मूल्य नियंत्रण दायरे में आता है, जिसमें दवा की ताकत या डोज में बदलाव किया जाता है। एनपीपीए किसी भी दवा की कीमत तय कर सकता है, जो शेड्यूल-1 के तहत आती हैं। एनपीपीए किसी भी नॉन शेड्यूल दवा की कीमतोंं की निगरानी कर सकता है।
एनपीपीए यह भी सुनिश्चित कर सकता है कि इन दवाओंं की कीमतों में सालाना 10 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ोतरी न हो। बिजनेंस स्टैंडर्ड में छपी इस रिपोर्ट को देखें तो औषधि मूल्य नियामक ने कंपनियों से कहा है कि वे बैचवार उत्पादन और बिक्री का विस्तृत ब्योरा दें, जिसमें अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) शामिल है। नोटिस में राज्य दवा नियामकों को बाजार मेंं बिकने वाली अनधिकृत दवाओं पर नजर रखने को कहा गया है। एनपीपीए ने उन दवा कंपनियों को लेकर सख्त रवैया अपनाया है, जो कथित रूप से निर्धारित मूल्य सीमा का उल्लंघन कर रही हैं। फरवरी में एनपीपीए ने 634 दवाओं का मूल्य ज्यादा लिए जाने को लेकर नोटिस भेजा था। इस बार भी एनपीपीए ने पाया कि इनकी संख्या अधिक है, इसलिए उन्हें सिर्फ कारण बताओ नोटिस भेजा गया है।  एनपीपीए मेडिकल उपकरणों जैसे हर्ट वाल्वों, ऑर्थोपैडिक इम्प्लांट्स और अन्य की कीमतों की निगरानी भी कर रहा है। भारत के दवा नियामक ने मंजूरी के बगैर मधुमेह और एंटीबॉयोटिक दवाओं को नए रूप में बेचे जाने को लेकर 65 घरेलू और विदेशी कंपनियों से मांगी गई सफाई पर कंपनियों ने जल्द अपना पक्ष रखने की बात कही है। इनमें ऐबट लैबोरेटरीज, सनोफी, नोवार्तिस, सन फार्मास्यूटिकल इंडस्ट्रीज और ल्यूपिन शामिल हैं।

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