जयपुर (राजस्थान)। नकली दवाओं के 58 मामले प्रकाश में आए हैं। वहीं कई दवा कंपनियों के लाइसेंस कैंसिल किए गए हैं। सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं की मौत के चलते स्वास्थ्य व्यवस्था सवालों के घेरे में है। अस्पतालों में इलाज और व्यवस्थाओं को लेकर विवाद है। वहीं नकली दवाओं के मामलों ने मरीजों की सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। पिछले तीन वर्षों में नकली दवाओं के 58 मामले सामने आए हैं। कई कंपनियों के लाइसेंस रद्द करने पड़े हैं।

एक कंपनी की दवा निर्माण गतिविधियों पर 29 मार्च 2025 से रोक लगा दी थी। इसके बावजूद कंपनी ने उत्पादन जारी रखा। अगस्त-सितंबर के दौरान बड़ी मात्रा में दवाएं राजस्थान में आईं। इसके बाद प्रदेश में 24 फर्मों का निरीक्षण किया गया। करीब 20 लाख रुपए की दवाएं जब्त की गईं। वित्तीय वर्ष 2023-24 में नकली दवाओं के 38 मामले सामने आए। वर्ष 2024-25 में ऐसे 16 मामले दर्ज हुए। वहीं वर्ष 2025-26 में 4 मामले सामने आए। इनमें इसी अवधि में 50 दवाएं अवमानक पाई गईं। कई फार्मा कंपनियों के लाइसेंस भी निरस्त किए गए।

कोटा स्थित न्यू मेडिकल अस्पताल में पांच प्रसूताओं की मौत की जांच रिपोर्ट भी सामने आई है। महिलाओं को लगाया गया ऑक्सीटॉसिन इंजेक्शन नकली पाया गया। रिपोर्ट में बताया गया कि इंजेक्शन में दवा की जगह पानी भरा था। इसके कारण प्रसव के बाद होने वाले अत्यधिक रक्तस्राव को नियंत्रित नहीं किया जा सका। इससे महिलाओं की मौत हो गई।