किडनी ट्रांसप्लांट कराने वालों को मुफ्त मिलेगी दवा

पटना। किडनी ट्रांसप्लांट कराने वाले मरीजों को जीवनभर दवा मुफ्त मिलेगी। दरअसल, मरीज को डोनर और सभी सुविधाएं मिलने पर भी वे किडनी ट्रांसप्लांट नहीं करवाते। इसका कारण यह है कि किडनी ट्रांसप्लांट के बाद हर माह करीब 15 हजार और साल में 2 लाख रुपए दवा पर खर्च होता है। गरीब व्यक्ति इतने पैसे खर्च पाने में असमर्थ रहता है। ऐसे मरीजों के लिए सरकार ने निर्णय लिया है कि किडनी ट्रांसप्लांट के बाद भी उनको जिंदगीभर दवा के लिए राशि उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार संस्थान को राशि उपलब्ध कराएगी, संस्थान मरीज को दवा देगा। आईजीआईएमएस में आयोजित सीएमई में ये बातें स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहीं। उन्होंने कहा कि आईजीआईएमएस में किडनी ट्रांसप्लांट के लिए सरकार तीन लाख रुपए देती है। इसमें दो लाख ऑपरेशन और एक लाख एक साल की दवा व जांच के लिए होता है। इसके बाद भी गरीब मरीज प्रत्यारोपण नहीं करा रहे हैं। इसकी वजह ट्रांसप्लांट पर हर माह होने वाला मोटा खर्च है। ऐसे में अब यह निर्णय लिया गया है कि ऐसे मरीजों को इलाज के साथ जिंदगी भर के लिए जितने पैसे दवाओं के लिए जरूरी होगा, सरकार देगी। उन्होंने कहा कि 54 मरीजों का सफल प्रत्यारोपण हो चुका है और वे बिल्कुल स्वस्थ है। जल्द ही परिसर में लीवर व हार्ट प्रत्यारोपण शुरू होगा। विधानसभा स्पीकर विजय कुमार चौधरी ने कहा कि किडनी ट्रांसप्लांट की दिशा में संस्थान ने बेहतर काम किया है। इंडियन सोसायटी ऑफ आर्गन ट्रांसप्लांट के प्रेसिडेंट डॉ. संदीप गुलेरिया ने कहा कि किडनी फेल्योर होने के दो प्रमुख कारण हैं। पहला डायबिटीज और दूसरा ब्लड प्रेशर। इसे हम नियंत्रित नहीं कर सके तो किडनी फेल्योर हो सकती है। ऐसे व्यक्ति को सतर्क होने की जरूरत है। चिकित्सा अधीक्षक मनीष मंडल ने कहा कि आर्गन ट्रांसप्लांट के दिशा में संस्थान आगे बढ़ रहा है। लाइव लीवर ट्रांसप्लांट की सुविधा कम राशि पर दी जाएगी। डॉ. हेमंत कुमार ने कहा कि किडनी ट्रांसप्लांट की दिशा में बेहतर परिणाम पाने के लिए समाज को जागरूक करना होगा। कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार, संस्थान के निदेशक डॉ. आरएन विश्वास, डीन डॉ.एसके शाही, डॉ. ओम कुमार, डॉ. अशोक कुमार, डॉ. विवेक, डॉ. शर्मिला, लखनऊ के डॉ. अमित गुप्ता, डॉ. अमरेश कृष्णा, डॉ. प्रीतपल सिंह, वैल्लौर के डॉ. संतोष वार्गिश, डॉ. आईबी सिन्हा, डॉ. अनिश श्रीवास्तव, डॉ. राजेश तिवारी, डॉ. हरिहर दीक्षित, डॉ. विभूति प्रसन्न सिन्हा मौजूद रहे।

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