स्वास्थ्य मंत्रालय दवा लाइसेंसिंग में करेगा बदलाव

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने देश भर में दवा सुरक्षा बढ़ाने के प्रयास में अपने दवा लाइसेंसिंग कार्यक्रम में महत्वपूर्ण बदलाव का प्रस्ताव दिया है। यह प्रस्ताव एक सरकारी विशेषज्ञ पैनल की सिफारिशों के अनुरूप भी है, जिसने समान गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित करने के लिए घरेलू स्तर पर निर्मित दवाओं के लिए लगातार दस्तावेज़ीकरण और डोजियर-आधारित अनुमोदन प्रक्रियाओं के महत्व पर जोर दिया है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) के साथ मसौदा शेयर किया है और प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहा है।

भारत में उत्पादित कफ सिरप से विदेशों में होने वाली मौत के बाद सरकार की ओर से ये कदम उठाया गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने “घटिया” गुणवत्ता को चिह्नित करते हुए भारत निर्मित सिरप पर अलर्ट जारी किया है। मौजूदा नियमों में एकरूपता की कमी के कारण असंगत प्रवर्तन, अविकसित परीक्षण बुनियादी ढांचे और नियमों को लागू करने में असमानताएं पैदा हुई हैं। मुख्य मुद्दा इस तथ्य से विस्तारित होता प्रतीत होता है कि केंद्र सरकार और अलग-अलग राज्य दोनों भारत में दवा निर्माण के लिए लाइसेंस जारी करते हैं।

ये भी पढ़ें- उत्तर प्रदेश में 20 हजार नशीली गोलियों के साथ दो गिरफ्तार

दवा नियामक ढांचे में एकरूपता लाने से दवा सुरक्षा, प्रभावशीलता और गुणवत्ता की गारंटी होने की उम्मीद है। मिंट की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली के पूर्व दवा नियंत्रक अतुल नासा के अनुसार, यह मानकीकरण यह भी सुनिश्चित कर सकता है कि फार्मास्युटिकल कंपनियां, विशेष रूप से छोटी कंपनियां, अच्छी विनिर्माण प्रथाओं (जीएमपी) दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन करें।

भारतीय स्वास्थ्य अधिकारी चिंतित हैं कि दूषित दवाएं वैश्विक दवा आपूर्तिकर्ता के रूप में देश की प्रतिष्ठा को और नुकसान पहुंचा सकती हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय का मानना ​​है कि औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 प्रावधानों का एक समान कार्यान्वयन दवा की गुणवत्ता की गारंटी देगा। विशेषज्ञ पैनल के विचार-विमर्श के बाद, एक राज्य दवा नियंत्रक ने दस्तावेज़-आधारित दवा लाइसेंसिंग के राष्ट्रव्यापी कार्यान्वयन की सिफारिश की।
योजना में संपूर्ण आपूर्ति श्रृंखला में दवाओं की गुणवत्ता की निगरानी के लिए बाजार निगरानी का एक समान कार्यान्वयन शामिल है। भारत में, सालाना 100,000 से अधिक दवा नमूनों का परीक्षण किया जाता है, लेकिन राज्यों और केंद्र के बीच समन्वय की कमी के कारण जांच और उसके बाद की कार्रवाइयों में देरी हो सकती है। इसका उद्देश्य संपूर्ण औषधि नियामक प्रणाली में एकरूपता लाना है।

Related Posts

अवैध रूप से संचालित क्लीनिक और निजी अस्पताल बंद कराए

पीथमपुर (मध्यप्रदेश)। अवैध रूप से संचालित क्लीनिक और निजी अस्पताल बंद कराए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने निजी अस्पतालों और क्लीनिकों की जांच की। लाइसेंस और जरूरी दस्तावेज नहीं दिखाने वाले…

जिला अस्पताल के सिरप में मिला कीड़ा, कार्रवाई की मांग

महराजगंज (यूपी)। जिला अस्पताल से लिए सिरप में कीड़ा मिलने का मामल सामने आया है। इसकी शिकायत पर बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने अस्पताल के गेट पर धरना-प्रदर्शन किया। इसके…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You Missed

अवैध रूप से संचालित क्लीनिक और निजी अस्पताल बंद कराए

  • By Desk
  • November 5, 2026
  • 9 views
अवैध रूप से संचालित क्लीनिक और निजी अस्पताल बंद कराए

जिला अस्पताल के सिरप में मिला कीड़ा, कार्रवाई की मांग

  • By Desk
  • November 5, 2026
  • 9 views
जिला अस्पताल के सिरप में मिला कीड़ा, कार्रवाई की मांग

दिव्यांश फार्मा पर बिना बिल की दवाएं जब्त, सप्लायर फरार

  • By Desk
  • November 5, 2026
  • 12 views
दिव्यांश फार्मा पर बिना बिल की दवाएं जब्त, सप्लायर फरार

मकान में छापेमारी कर 6.47 लाख की संदिग्ध दवाएं जब्त

  • By Desk
  • November 5, 2026
  • 13 views
मकान में छापेमारी कर 6.47 लाख की संदिग्ध दवाएं जब्त

एनपीपीए ने कैंसर दवाओं की संशोधित एमआरपी सूची जारी की

  • By Desk
  • November 5, 2026
  • 10 views
एनपीपीए ने कैंसर दवाओं की संशोधित एमआरपी सूची जारी की

जिला नागरिक अस्पताल से 6800 नशीली टैबलेट चोरी

  • By Desk
  • November 4, 2026
  • 28 views
जिला नागरिक अस्पताल से 6800 नशीली टैबलेट चोरी