नई दिल्ली। एसिडिटी और अल्सर में इस्तेमाल होने वाली मशहूर दवा रैनिटिडीन से कैंसर का खतरा बताया गया है। इस दवा में कैंसर पैदा करने वाली अशुद्धि पाई जाती है। सरकार ने इसे बनाने और इस्तेमाल करने के लिए उचित कदम उठाने का फैसला किया है।

सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (सीडीएससीओ) ने ड्रग कंट्रोलरों को इस बारे में निर्देश दिए हैं। रैनिटिडीन की एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रीडिएंट और तैयार दवा दोनों में NDMA की मात्रा की जांच को कहा गया है। इसके साथ ही इसकी शेल्फ लाइफ को भी घटाने की सिफारिश की गई है। ये आदेश ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया डॉ. राजीव सिंह रघुवंशी ने दिए हैं। ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड की बैठक की सिफारिशों के बाद ये फैसला लिया गया है। बैठक में दिसंबर 2024 में गठित एक्सपर्ट कमेटी की रिपोर्ट पर चर्चा हुई थी, जिसमें रैनिटिडीन में NDMA को लेकर चिंता जताई गई थी।

DTAB ने सुझाव दिया कि इस दवा में हृष्ठरू्र बनने की प्रक्रिया जैसे पहलुओं की जांच के लिए समिति बनाने का सुझाव दिया गया। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च को भी रैनिटिडीन के लंबे समय तक इस्तेमाल से असर पर स्टडी करने को कहा है। रैनिटिडीन को इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर ने ग्रुप 2्र कार्सिनोजेन की कैटेगरी में रखा है। इसका मतलब है कि ये इंसानों में कैंसर पैदा कर सकती है। मैक्स द्वारका के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. लोहित चौहान ने बताया कि इसे खाना जारी नहीं रखना चाहिए। जबकि फेमोटिडीन और पैंटोप्राजोल जैसे सुरक्षित ऑप्शन मौजूद हैं।

दवाई कंपनियों को अब रिस्क-बेस्ड सुरक्षा कदम अपनाने के लिए कहा गया है। कई देशों में रैनिटिडीन की बिक्री पर रोक लगाई जा चुकी है। भारत में अब इसके सुरक्षित इस्तेमाल को लेकर सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।