नई दिल्ली। एंटीबायोटिक दवा की पहचान अब रैपर देखकर ही कर सकेंगे। इस बारे में केंद्र सरकार जल्द आदेश लागू करने जा रही है। एंटीबायोटिक दवाओं के गलत इस्तेमाल पर लगाम लगाने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है।

सरकार एंटीबायोटिक दवाओं को बाजार में अलग पहचान के साथ बेचने की तैयारी में है। इससे आम लोग आसानी से समझ सकेंगे कि दवा एंटीबायोटिक है या नहीं।

इसके लिए सीडीएससीओ को दिशा-निर्देश जारी करने को कहा है। सरकार का प्रस्ताव है कि एंटीबायोटिक दवाओं की पैकिंग पर विशेष कोडिंग हो। वहीं, रंग संकेत या स्पष्ट मार्किंग की जाए। इससे मरीज और फार्मासिस्ट दोनों को दवा की श्रेणी तुरंत समझ में आ सकेगी। हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी ने एंटीबायोटिक दवाओं के बढ़ते इस्तेमाल पर चिंता जताई थी। लोगों से इन दवाओं का इस्तेमाल बहुत जरूरत पडऩे पर ही करने की अपील की थी। इन दवाओं से लोगों में प्रतिरोध विकसित हो रहा है।

यह कदम एंटी माइक्रोबियल रेजिस्टेंस के बढ़ते खतरे को देखते हुए उठाया जा रहा है। बिना जरूरत एंटीबायोटिक लेने से बैक्टीरिया दवाओं के प्रति प्रतिरोधी हो रहे हैं। इससे सामान्य संक्रमण भी जानलेवा बनते जा रहे हैं। फिलहाल पैकिंग से आम मरीज यह पहचान नहीं कर पाता कि दवा है या सामान्य पेनकिलर। इसी का फायदा उठाकर कई जगह बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक बेची जा रही हैं।