नई दिल्ली। कैंसर की पुरानी दवा अंतरिक्ष से लौटने पर सुपर मेडिसिन बन गई है। कैंसर की दवा पेम्ब्रोलिज़ुमैब देने के तरीके में बड़ा बदलाव आ गया है। वैज्ञानिकों ने इस दवा की बनावट में सुधार कर दिया है। अब इसे सिर्फ एक मिनट के इंजेक्शन के ज़रिए त्वचा के नीचे दिया जा सकता है।

इस खोज के पीछे फार्मा कंपनी Merck, NASA और इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन की साझेदारी है। Merck ने कैंसर की मशहूर दवा Keytruda में इस्तेमाल होने वाले पेम्ब्रोलिज़ुमैब के क्रिस्टल्स को अंतरिक्ष में उगाया। दरअसल, अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण नहीं होता।

ऐसे माहौल में दवाओं के क्रिस्टल जमीन से अलग तरीके से बनते हैं। ISS पर पेम्ब्रोलिज़ुमैब के क्रिस्टल ज्यादा समान, मजबूत और स्थिर बने। धरती पर क्रिस्टल टेढ़े-मेढ़े और असमान बनते थे। वहीं अंतरिक्ष में बने क्रिस्टल एक जैसे और साफ दिखे। यूरोपियन स्पेस एजेंसी के एस्ट्रोनॉट थॉमस पेस्के जैसे अंतरिक्ष यात्रियों ने इन प्रयोगों को अंजाम दिया। इसकी मदद से वैज्ञानिकों ने धरती पर भी वैसी ही क्रिस्टल संरचना तैयार कर ली।

इस से दवा का नया रूप तैयार हुआ। इसे त्वचा के नीचे इंजेक्शन के रूप में दिया जा सकता है। पहले यह इलाज 2 घंटे तक चलता था। अब सिर्फ 1 मिनट में हर तीन हफ्ते में एक इंजेक्शन काफी है।