नई दिल्ली। मेडिसिन के भ्रामक विज्ञापनों पर उपराज्यपाल (एलजी) या प्रशासक सीधे एक्शन लेंगे। गंभीर बीमारियों के शर्तिया इलाज वाली दवाओं के विज्ञापनों पर एक्शन की राष्ट्रपति ने इजाजत दे दी है। इसके तहत प्रशासक विज्ञापनों से जुड़े परिसरों की तलाशी लेने, दस्तावेज जब्त करने को सक्षम अधिकारियों को अधिकृत कर सकेंगे।
सरकार का मानना है कि इससे झूठे और अवैज्ञानिक दावों के प्रसार पर अंकुश लगेगा। साथ ही मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी। केंद्र सरकार ने प्रशासकों और उपराज्यपालों को राज्य सरकार की शक्तियों के प्रयोग का अधिकार सौंप दिया है।
गृह मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार यह आदेश राष्ट्रपति की स्वीकृति से लागू किया गया है। यह अगले आदेश तक प्रभावी रहेगा। यह कदम सार्वजनिक स्वास्थ्य और उपभोक्ता संरक्षण को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया है।










