नई दिल्ली। भारतीय दवा नियमों में बड़े सुधार की जरूरत पर जोर दिया गया है। देश के फार्मा उद्योग के दिग्गजों ने तीव्र, सरल तथा और ज्यादा भरोसेमंद नियमन की वकालत की है।
उन्होंने आगाह किया कि मंजूरियों में देरी, क्लीनिकल परीक्षणों का कमजोर बुनियादी ढांचा इस क्षेत्र को पीछे खींच रहा है। जबकि वैश्विक प्रतिस्पधी मूल्य श्रृंखला में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। भारतीय फार्मा के इतिहास और भविष्य पर समूह चर्चा के दौरान उद्योग के दिग्गजों ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि भारत को जेनेरिक प्रधान प्रारूप से ज्यादा मूल्य वाले नवाचार की ओर बढऩा है, तो तुरंत अपने नियामकीय तंत्र में सुधार लाना होगा। उद्योग के इन दिग्गजों में सन फार्मा के प्रबंध निदेशक दिलीप सांघवी, सिप्ला के चेयरमैन डॉ. यूसुफ हामिद, डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज के प्रबंध निदेशक जीवी प्रसाद, ल्यूपिन की सीईओ विनीता गुप्ता आदि शामिल थे।
उद्योग के दिग्गज सांघवी ने कहा कि भारत में मंजूरी मिलने से पहले चरण-1 के परीक्षण अक्सर बेल्जियम या ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में पूरे हो जाते हैं। इससे यह पता चलता है कि अगर देश नवाचार का हब बनना चाहता है तो प्रक्रिया को आसान बनाना होगा। सरकार के हालिया कदम इस इरादे का संकेत देते हैं। इनमें पीआरआईपी और 1,000 क्लीनिकल परीक्षण केंद्रों सेंटर को प्रमाणपत्र देने की योजना शामिल है। लेकिन अहम बात इन पर अमल करना है।










