नई दिल्ली। ओवर-द-काउंटर दवाएं बिना डॉक्टर के पर्चे के मिल सकेंगी। स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुलभ बनाने के लिए केंद्र सरकार बड़े बदलाव की तैयारी में है। ओटीसी दवाओं के लिए एक मजबूत नियामक ढांचा अंतिम रूप लेता दिख रहा है।

स्वास्थ्य मंत्रालय सिफारिशों के बाद ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट में नया शेड्यूल जोडऩे पर विचार कर रहा है। यह सीधे तौर पर आम आदमी के लिए लाभदायक होगा। इस नियामक यात्रा की शुरुआत साल 2017 में हुई थी। मंत्रालय ने उप-समिति का गठन किया था। इस समिति ने 2019 में अपनी व्यापक रिपोर्ट सौंपी। इसमें ओटीसी दवाओं की परिभाषा, उनके वर्गीकरण और बिक्री के नियमों पर चर्चा की गई थी। इसके बाद एक अन्य समिति ने इन सिफारिशों की समीक्षा की।

आहूजा समिति ने विशेष रूप से दवाओं को दो श्रेणियों में बांटने का सुझाव दिया है। पहली वे जिन्हें सामान्य खुदरा दुकानों से खरीदा जा सकेगा। दूसरी वे जिन्हें केवल एक पंजीकृत फार्मासिस्ट की देखरेख में बेचा जाएगा। इस नई नीति का सबसे बड़ा लाभ दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले मरीजों को होगा। जिन्हें छोटी-छोटी बीमारियों के लिए भी डॉक्टर की महंगी फीस और लंबी यात्राएं करनी पड़ती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बुखार , उल्टी, जुकाम जैसी सामान्य बीमारियों के लिए डॉक्टर के पर्चे की बाध्यता नहीं होगी। एक योग्य फार्मासिस्ट सीधे इन दवाओं को दे सकेगा। इससे स्वास्थ्य सेवाओं की लागत में भारी कमी आएगी।