भोपाल (मप्र)। आयुष्मान भारत योजना को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। सरकार ने कहा है कि एनएबीएच का फाइनल लेवल सर्टिफिकेट वाले अस्पताल ही इस योजना में शामिल रहेंगे। इससे 480 अस्पतालों में से 295 अस्पताल योजना से बाहर हो जाएंगे। ऐसे में मरीजों की परेशानी बढऩे की आशंका जताई जा रही है। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर व जबलपुर प्रदेश के सबसे बड़े मेडिकल हब हैं। छोटे जिलों के मरीज भी इलाज के लिए यहीं रेफर किए जाते हैं।
सरकार का तर्क है कि इन शहरों में मरीजों का दबाव सबसे ज्यादा है। शिकायतें भी यहीं से अधिक मिली हैं। कोरोना के दौरान बड़ी संख्या में निजी अस्पताल इस योजना से जुड़े थे। इसके बाद इलाज की गुणवत्ता और फर्जी बिलिंग को लेकर शिकायतें मिली। इसी वजह से पहले चरण में इन चार बड़े शहरों में एनएबीएच सर्टिफिकेट अनिवार्य करने का फैसला किया है।
आईएमए और नर्सिंग होम एसोसिएशन का विरोध
मप्र नर्सिंग होम एसोसिएशन और आईएमए स्टेट जबलपुर ने आदेश का विरोध किया है। इनका कहना है कि एनएबीएच वॉलंटरी एक्रिडिटेशन है। इसे जरूरी बनाना गलत है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण ने इसे अनिवार्य नहीं किया है।










